पाकिस्तान ने धनशोधन निवारण और आतंकवाद वित्तपोषण निरोधक प्रकोष्ठ का गठन किया

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jul 05, 2021

 इस्लामाबाद। पाकिस्तान के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने वित्तीय अपराधों और अवैध हस्तांतरण पर अंकुश लगाने के लिए एक धनशोधन निरोधक प्रकोष्ठ का गठन किया है। पाकिस्तान धन शोधन और आतंकवाद को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने वाले संगठनों पर लगाम लगाने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था वित्तीय कार्रवाई कार्यबल (एफएटीएफ) की ‘ग्रे सूची’ से बाहर निकलने के लिए संघर्ष कर रहा है। एफएटीएफ ने जून 2018 को पाकिस्तान को इस सूची में रखा था और पाकिस्तान से 2019 के अंत तक धनशोधन और आतंक वित्तपोषण पर अंकुश लगाने के लिए एक कार्य योजना लागू करने के लिए कहा था, लेकिन बाद में कोविड-19 महामारी के कारण समय सीमा बढ़ा दी गई थी।

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‘डॉन’ अखबार ने सोमवार को एक खबर में बताया कि वित्तीय एफएटीएफ की ग्रे सूची से बाहर निकलने के लिए संघर्ष कर रहे देश के राष्ट्रीय जवाबदेही ब्यूरो (एनएबी) ने कार्रवाई की। यह कदम तब उठाया गया है जब एफएटीएफ ने पिछले महीने धनशोधन की जांच में विफल रहने के लिए पाकिस्तान को अपनी ‘ग्रे सूची’ में बनाए रखा था। वैश्विक संस्था ने भी पाकिस्तान से धनशोधन और आतंक वित्तपोषण के खिलाफ रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कमियों को दूर करने के लिए कहा था। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अखबार को बताया कि धनशोधन निवारण और आतंकवाद वित्तपोषण निरोधक प्रकोष्ठ (एएमएल एंड सीएफटी) एफएटीएफ सचिवालय और संबंधित हितधारकों के साथ धनशोधन और आतंक वित्तपोषण को रोकने के लिए समन्वय करेगा।

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खबर में कहा गया है कि आतंकवाद के वित्तपोषण के मामलों की जांच की मुख्य जिम्मेदारी अभी भी संघीय जांच एजेंसी (एफआईए) के पास होगी। एनएबी के एक अधिकारी के अनुसार, भ्रष्टाचार के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (यूएनसीएसी) का सदस्य होने के नाते, ब्यूरो के लिए ‘सभी के लिए जवाबदेही’ नीति को अपनाकर भ्रष्टाचार को खत्म करने और पाकिस्तान को भ्रष्टाचार मुक्त बनाने के लिए एक प्रकोष्ठ स्थापित करना अनिवार्य था। एफएटीएफ ने पाकिस्तान से संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था। पाकिस्तान में इन आतंकवादियों में जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) प्रमुख मसूद अजहर, लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के संस्थापक हाफिज सईद और इसके ‘ऑपरेशनल कमांडर’ जकीउर रहमान लखवी शाामिल हैं। अजहर, सईद और लखवी 26 नवम्बर, 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों और 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की बस पर बमबारी सहित कई आतंकवादी कृत्यों में शामिल होने के लिए भारत में अति वांछित आतंकवादी हैं।

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