पाकिस्तान : शीर्ष अदालत ने फैसलों की समीक्षा का कानून रद्द किया, नवाज शरीफ की उम्मीदों पर फिरा पानी

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Aug 11, 2023

पाकिस्तान के उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को सर्वसम्मति से लिए गए एक निर्णय में अपने फैसलों की समीक्षा करने की प्रक्रिया में संशोधन करने वाले एक कानून को रद्द कर दिया। इस फैसले से सार्वजनिक पद धारण करने के लिए आजीवन अयोग्य ठहराए जाने के फैसले को चुनौती देने के इच्छुक पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। प्रधान न्यायाधीश उमर अता बंदियाल की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ ने फैसले में कहा कि उच्चतम न्यायालय (फैसलों और आदेशों की समीक्षा) कानून-2023 असंवैधानिक था। अदालत ने 87 पेज के आदेश में कहा, ‘‘संसद उच्चतम न्यायालय के अधिकार क्षेत्र और शक्तियों से संबंधित किसी भी मामले पर कानून नहीं बना सकती।’’ उसने कहा कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि संविधान की व्याख्या करने का अधिकार निरपेक्ष रूप से पाकिस्तान की उच्चतम न्यायालय के पास है। छह सुनवाई के बाद उच्चतम न्यायालय ने 19 जून को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

जियो न्यूज की खबर में कहा गया है कि यदि आज का फैसला याचिकाकर्ताओं के पक्ष में रहा होता, तो दोनों नेताओं को अपनी अयोग्यता को चुनौती देने का मौका मिल जाता। प्रधान न्यायाधीश उमर अता बंदियाल की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की तीन सदस्यीय पीठ ने विवादास्पद कानून को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई करने के बाद फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति इजाजुल अहसन और न्यायमूर्ति मुनीब अख्तर भी इस पीठ में शामिल थे। विस्तृत फैसले में कहा गया है कि यह कानून संसद की विधायी क्षमता से परे होने के साथ-साथ ‘संविधान के प्रतिकूल’ है। आदेश में कहा गया है, ‘‘तदनुसार इसे अमान्य मानते हुए रद्द किया जाता है और इसका कोई विधिक असर नहीं होगा।’’ अदालत ने कहा कि यह कानून उच्चतम न्यायालय की शक्तियों और क्षेत्राधिकार के सामान्य कानून में हस्तक्षेप करने का एक प्रयास था। अदालत द्वारा कानून रद्द करने पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए पूर्व कानून मंत्री आजम नजीर तरार ने जियो न्यूज से कहा कि फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है। कानून को निष्प्रभावी घोषित किए जाने के बाद नवाज शरीफ के भाग्य के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि फैसले का पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) के सर्वोच्च नेता की अयोग्यता के मामले पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘यह अच्छी परंपरा नहीं है कि अदालतें बार-बार संसद के कामकाज में हस्तक्षेप करें और ऐसे फैसले दें, जो इसकी स्वतंत्रता को नुकसान पहुंचाएं।’’ यह कानून तब लाया गया था, जब पंजाब और खैबर-पख्तूनख्वा प्रांत में चुनाव कराने पर मतभेद के कारण कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच तनाव बढ़ गया था। चूंकि, प्रधान न्यायाधीश बंदियाल स्वत: संज्ञान लेकर कार्रवाई कर रहे थे, इसलिए सरकार ने स्वत: संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करने की उनकी विवेकाधीन शक्तियों को कम करने और ऐसे मामलों पर आगे बढ़ने के लिए न्यायाधीशों के पैनल का गठन करने के लिए जल्दबाजी में एक कानून पारित किया था। कानून ने स्वत: संज्ञान क्षेत्राधिकार के तहत अदालत द्वारा लिए गए निर्णयों के खिलाफ समीक्षा के दायरे को भी बढ़ा दिया था और ऐसे निर्णयों से प्रभावित सभी लोगों को अपील दायर करने की अनुमति दे दी थी।

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