By अनन्या मिश्रा | Aug 09, 2026
सेकेंड वर्ल्ड वॉर के दौरान जपाना ने तबाही का वह भयावह मंजर देखा था, जिसके निशान आज भी मौजूद हैं। अमेरिका ने 06 अगस्त 1945 को जापान के हिरोशिमा में परमाणु बम गिराया था। वहीं ठीक तीन दिन बाद 09 अगस्त 1945 को नागासाकी में परमाणु हमला कर इस शहर को भी तबाह कर दिया था। आज इस घटना को 80 साल से अधिक का समय हो गया, लेकिन इस नरसंहार को इतिहास में भुलाया नहीं जा सकता है।
नागासाकी में में गिराए गए परमाणु बम का नाम फैट-मैन था। 09 अगस्त की सुबह 11 बजे के आसपास नागासाकी में परमाणु विस्फोट हुआ। इसका असर ऐसा था कि वहां के लोगों को यह तक सोचने का समय नहीं मिला कि आखिर हुआ क्या है। सभी लोग मौत की चपेट में आ गए। पहाड़ों से घिरे होने के कारण नागासाकी में करीब 6.7 वर्ग किमी के इलाके में तबाही का मंजर देखने को मिला। इस घटना में कम से कम 75 हजार लोगों की मौत हो गई थी।
परमाणु बम का असर ऐसा दिखा कि कई सालों तक जापान के इस शहर में रहने वाले लोग जलन, विकिरण बीमारी और अन्य घावों की वजह से मरते रहे। इस हमले से हिरोशिमा में कुल 1 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई।
इस तबाही के मंजर को देखते हुए जापान ने परमाणु शक्ति के शांतिपूर्ण इस्तेमाल और कभी भी परमाणु बम न बनाने का फैसला लिया। हालांकि जापान के दो शहरों को तबाह करने के बाद अमेरिका ने इसके लिए कभी माफी नहीं मांगी।