By अभिनय आकाश | Jun 30, 2026
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वो कर दिखाया है जो आज तक पाकिस्तान से कोई भी नहीं करवा पाया। पीएम मोदी ने एक ऐसी चाल चली है कि पाकिस्तान पूरी दुनिया के सामने खुद चिल्ला-चिल्लाकर अपनी बेचैनी को और अपनी बौखलाहट को जाहिर कर रहा है। इस बार मुनीर के चेलों ने सारी हदें पार कर दी। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री है ख्वाजा आसिफ। पिछले दिनों ख्वाजा आसिफ अपने आका मुनीर को खुश करने के लिए एक बयान देते हैं और अपने बयान में यह कहते हैं कि वह सिंधु जल का पानी हासिल करने के लिए हिंदुस्तान से जंग लड़ने को तैयार है। जनरल मुनीर के तमाम चेले चपाटे एक के बाद एक गीदड़ भभकी देने लगे। कोई यह कह रहा है अब कि हम पानी पर उठने वाले हर हाथ को काट देंगे। तो कोई यह कह रहा है कि पाकिस्तान के लिए पानी रेड लाइन है।
दरअसल पाकिस्तान की जनता यह जान गई है कि पाकिस्तान में पानी संकट इनके हुक्मरानों की आतंकी गतिविधियों की वजह से खड़ा हुआ है। यह ना अपनी जमीन पर आतंकी पालते ना भारत पर पहलगाम जैसे हमले कराते और ना भारत सिंधु जल समझौता रद्द करता। लेकिन पाकिस्तान जो है यह अपनी हरकतों से बाज कहां आने वाला है। शहबाज सरकार के एक मंत्री हैं मुसादिक मलिक। यह मुल्ले मौलानाओं की सभा में बैठकर एक ऐलान करते हैं, एक बयान देते हैं। गीदड़ भभकी देते हैं कि पाकिस्तान उन हाथों को काट देगा जो सिंधु जल संधि के तहत पाकिस्तान का पानी रोकेगा। आपको बता दें कि मुसादिक मलिक जलवायु मंत्री है पाकिस्तान के अंदर। अब मुल्ले मलिक से कोई पूछे कि हिंदुस्तान ने तो सिंधु जल समझौता एक साल पहले ही रद्द कर दिया था।
पाकिस्तान का पानी तो रुक चुका है। ऑपरेशन सिंदूर में जो मार पड़ी उसके जख्म तो भरे नहीं है। अब ये नई जंग का सोच रहे हैं। दरअसल पाकिस्तान में यह जो पानी का मसला है यह एक बार फिर से सुर्खियों में आया क्योंकि ख्वाजा आसिफ ने एक विवादित बयान दिया। ख्वाजा आसिफ ने यह कहा था कि पाकिस्तान पानी के लिए भारत से जंग लड़ने को तैयार है। तब से लेकर अब तक बिलावल भुट्टो सिंधु के पानी में खून बहाने की बात कर चुके हैं। अब मुसादिक मलिक हाथ काटने की गीदड़ भभकी दे रहे हैं।
दरअसल बता दें कि भारत ने सिंधु संधि के तहत पाकिस्तान को मिलने वाले सपोर्ट सिस्टम को खत्म कर दिया। नदी के जल प्रवाह को लेकर दोनों मुल्कों के बीच बातचीत होती थी। संदेश एक दूसरे को भेजे जाते थे। जल प्रवाह हो, बांध हो या फिर कोई परियोजना हो या जल प्रबंधन को लेकर लगातार संपर्क होता था दोनों देशों के बीच में। अब भारत ने इसी सपोर्ट पर रोक लगा दी है पिछले एक साल से। सिंधु समझौता 1960 में हुआ था। इसे वैश्विक बैंक ने करवाया था। कौन सी नदी का पानी किसे मिलेगा, कौनकितना इस्तेमाल करेगा, यह सब इसी समझौते से तय हुआ था। 1960 से लेकर अब तक यही समझौता दोनों देशों के बीच पानी के बंटवारे को कंट्रोल करता रहा है। लेकिन पाकिस्तान की आतंकी हरकतों ने इस बंटवारे के सारे दरवाजे बंद कर दिए।
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