By रेनू तिवारी | Sep 11, 2026
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हाल ही में हुए 'मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट' (जिसे कूटनीतिक हलकों में 'इस्लामिक NATO' भी कहा जा रहा था) को लेकर वैश्विक राजनीति में हलचल मची हुई है। इसी बीच पाकिस्तान ने अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए इस तीन-तरफ़ा समझौते पर बड़ा यू-टर्न लिया है। इस्लामाबाद ने अब इसे विशुद्ध रूप से एक "रक्षात्मक गठबंधन" (Defensive Alliance) करार दिया है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य किसी युद्ध में कूदने के बजाय क्षेत्रीय सुरक्षा और आक्रामकता को रोकना (Deterrence) है। पाकिस्तान का यह बयान ईरान समर्थित हूथी विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब पर किए जा रहे लगातार हमलों और उनके जवाब में पाकिस्तानी सेना की संभावित भागीदारी की अटकलों के बाद आया है।
पाकिस्तान के विदेश कार्यालय के प्रवक्ता सज्जाद हैदर खान ने साप्ताहिक प्रेस ब्रीफिंग में कहा, "इस चरण में, मक्का समझौते के विस्तार को लेकर कोई चर्चा नहीं हो रही है।" "पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की को सबसे पहले अपने संगठन और सहयोग को और मजबूत करना होगा।"
सऊदी अरब पर हूथी हमले
खान का यह स्पष्टीकरण पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के उस बयान के बाद आया है जिसमें उन्होंने कहा था कि सऊदी अरब पर हूथी हमलों से मक्का समझौता एक्टिवेट हो सकता है। ईरान समर्थित हूथी लगातार सऊदी अरब को निशाना बनाते रहे हैं। मंगलवार को हुए अपने हालिया हमले में, उन्होंने सऊदी अरब के दक्षिणी हिस्से पर मिसाइलों की बौछार कर दी, जिसमें कम से कम 73 लोग घायल हो गए।
आसिफ ने मंगलवार रात जियो न्यूज़ को बताया, "अगर बिना उकसावे के कोई हमला होता है, या यमन में जो कुछ हो रहा है उसका असर सऊदी अरब तक फैलता है, तो निश्चित रूप से मक्का समझौता लागू हो जाएगा।" "इसमें कोई शक नहीं होना चाहिए। हम इस समझौते की शर्तों और नियमों से बंधे हैं, और... ज़रूरत पड़ने पर हम उनका पालन करेंगे।"
हालांकि, पाकिस्तान ने अब अपना रुख बदल लिया है, जिससे इस्लामाबाद को एक बार फिर शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है और यह सोचने पर मजबूर होना पड़ा है कि क्या वह वास्तव में तुर्की और सऊदी अरब को कोई सुरक्षा गारंटी दे पाएगा।
क्या मक्का समझौते का विस्तार होगा? इस बीच, खान ने गुरुवार को यह भी कहा कि अभी यह समझौता सिर्फ़ तीन सदस्यों के बीच है, लेकिन बाद में इसके विस्तार पर फ़ैसला लिया जा सकता है। खबरों के मुताबिक, बांग्लादेश और मिस्र जैसे कई देशों ने इस समझौते में शामिल होने में दिलचस्पी दिखाई है, लेकिन अभी तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
खान ने कहा, "संगठन के ढांचे, कामकाज के तरीकों और प्रक्रियाओं को अंतिम रूप देने के लिए अभी काफी काम करना बाकी है।" उन्होंने यह भी कहा कि यह समझौता "उन सभी देशों के लिए खुला रहेगा जिनकी सोच और नज़रिए एक जैसे हैं"।
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