पाकिस्तान को चुकानी पड़ेगी दोहरी नीति की कीमत, अफगानिस्तान घटनाक्रम के बाद अब अमेरिका लेने जा रहा है बड़ा फैसला

By अभिनय आकाश | Sep 15, 2021

आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान की दोहरी नीति जग जाहिर है, लेकिन अब अफगानिस्तान को लेकर भी उसका डबल गेम दुनिया के सामने आ गया है। पाकिस्तान की इस दोहरी नीति को अमेरिका ने बेनकाब किया है। इसके साथ ही अमेरिका अब अफगानिस्तान के पूरे घटनाक्रम के बाद पाकिस्तान के खिलाफ बड़ा कदम उठा सकता है। बाइडेन प्रशासन की ओर से इसके संकेत भी दे दिए गए हैं। अमेरिका ने पाकिस्तान के साथ रिश्तों की नए सिरे से समीक्षा करने का फैसला कर सकता है। विदेश मंत्री टोनी ब्लिंकन ने अमेरिकी सांसदों से कहा है कि अमेरिका यह देखेगा कि बीते बीस वर्षों में पाकिस्तान की भूमिका क्या रही है। जिन कारणों का आपने और अन्य लोगों का हवाला दिया है, यह उन चीजों में से एक है जिसे हम आने वाले दिनों और हफ्तों में देखेंगे, पाकिस्तान ने पिछले 20 वर्षों में जो भूमिका निभाई है और आने वाले वर्षों में जिस भूमिका में हम उसे देखना चाहते हैं।

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अमेरिका ने तालिबान को लेकर दी वार्निंग 

अफगानिस्तान में तालिबान शासन आने के बाद पाकिस्तान ज्यादा ही उत्साहित नजर आ रहा है। पाकिस्तान ने तालिबान शासन आने की खुशी में मिठाई भी बांटी है। तालिबान को लेकर पाकिस्तान की खुशी से अमेरिका खासा नाराज है। अमेरिका ने तालिबान को लेकर वार्निंग दी है। अमेरिका की तरफ से इमरान सरकार को साफ संदेश दिया गया है कि जब तक तालिबान अपने वादों को पूरा नहीं करता है, तब तक उसे मान्यता न दे। बाइडेन सरकार ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा कि तालिबान जब तक अपने किए वादे की दिशा में काम नहीं करता। तब तक तालिबान की मान्यता को लेकर विचार न करे। अमेरिका ने साफ कह दिया कि पहले तालिबान अपने दो बड़े वादे को पूरा करे। 

पहला वादा- महिलाओं और लड़कियों को हक देना।

दूसरा वादा- अफगानिस्तान छोड़ने के इच्छुक अफगानियों को मंजूरी दे।

भारत के साथ मजबूत संबंधों पर विचार

कांग्रेस सदस्य स्कॉट पैरी ने कहा कि पाकिस्तान अमेरिकी करदाताओं के पैसे से हक्कानी नेटवर्क और तालिबान का समर्थन करता है और अमेरिका को उसे अब और पैसा नहीं देना चाहिए तथा गैर नाटो सहयोगी का दर्जा भी उससे छीन लेना चाहिए। रिपब्लिकन कांग्रेस सदस्य मार्क ग्रीन ने कहा कि आईएसआई जिस तरह से तालिबान और हक्कानी नेटवर्क को खुलेआम समर्थन दे रहा है, ऐसे में भारत के साथ मजबूत संबंधों पर विचार करना चाहिए। 

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