अफगानिस्तान में शांति के लिए तालिबान से मुलाकात करेंगे इमरान खान

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jul 24, 2019

वॉशिंगटन। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने मंगलवार को कहा कि वह अफगानिस्तान में 18 साल से चल रहे युद्ध को समाप्त करने के प्रयासों के तहत स्वदेश लौटने के बाद तालिबान के साथ मुलाकात करेंगे। खान ने अमेरिका की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा के दौरान यहां कहा कि उन्होंने अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी से भी मुलाकात की है। उन्होंने कहा कि अब स्वदेश लौटने पर मैं तालिबान से मुलाकात करूंगा और उन्हें अफगानिस्तान सरकार के साथ बातचीत करने की खातिर राजी करने के प्रयास करूंगा। इससे पहले, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में खान की मेजबानी की।

इसे भी पढ़ें: किसी भी अंतरराष्ट्रीय विवाद में मध्यस्थता करने के योग्य ही नहीं हैं ट्रंप

खान ने ‘यूएस इंस्टीट्यूट फॉर पीस’ में कहा कि जुलाई 2018 में चुनाव में उन्हें मिली जीत के बाद इस्लामी अतिवादी अफगान तालिबान ने उनसे संपर्क किया था, लेकिन उन्होंने उस समय मुलाकात नहीं की थी क्योंकि काबुल इसके पक्ष में नहीं था। उन्होंने कहा कि आतंकवादियों ने उनसे इसलिए संपर्क किया ‘‘क्योंकि मैंने हमेशा कहा है’’ कि अफगानिस्तान में युद्ध का ‘‘कोई सैन्य समाधान नहीं’’ है।खान ने कहा, ‘‘इसलिए वे मुझ पर कुछ हद तक विश्वास करते हैं।’’ उन्होंने आतंकवादियों के बारे में सचेत करते हुए कहा कि कोई केंद्रीकृत कमान नहीं होने के कारण यह आसान नहीं होगा।

इसे भी पढ़ें: ओसामा बिन लादेन के खिलाफ अमेरिका की कारवाई पर मैंने शर्मिंदगी महसूस की थी: इमरान खान

अफगानिस्तान में अमेरिका के शांति दूत ज़लमय खलीलजाद ताजा वार्ता के लिए सोमवार को काबुल रवाना हुए, जहां से वह कतर के दोहा जाएंगे। खलीलजाद ने पिछले साल तालिबान के साथ कई बैठकें कीं। उन्होंने हाल में दोहा में नौ जुलाई को बैठक की थी। वार्ता प्रक्रिया में अभी तक सबसे बड़ी बाधा यह रही है कि तालिबान अफगानिस्तान सरकार के साथ सीधे वार्ता नहीं करना चाहता। खान ने इस बात पर भी जोर दिया कि अफगानिस्तान में सितंबर में होने वाले राष्ट्रपति पद के चुनाव ‘‘समावेशी होने चाहिए जिनमें तालिबान भी भाग ले।’’ खान ने कहा, ‘‘लेकिन हमारा मानना है कि यदि हम मिलकर काम करते हैं, तो अफगानिस्तान में शांति स्थापना की सर्वाधिक संभावना होगी।’’

इसे भी पढ़ें: पोम्पिओ से मिले इमरान खान, अफगान शांति प्रक्रिया और आतंकवाद पर हुई चर्चा

उल्लेखनीय है कि जब तालिबान 1990 के दशक में अफगानिस्तान में सशक्त हुआ था, उस समय पाकिस्तान तालिबान का मुख्य प्रयोजक था। तालिबान पर पाकिस्तान के प्रभाव को किसी भी राजनीति सुलह को कराने में अहम माना जा रहा है। इसी प्रभाव के कारण पाकिस्तान पर यह भी आरोप लगता रहा है कि वह तालिबान सहयोगी हक्कानी समूह जैसे आतंकवादी संगठनों के जरिए अफगानिस्तान में संघर्ष को हवा देता रहा है। खान ने असामान्य रूप से ‘ऑन रिकॉर्ड’ स्वीकार किया कि पाकिस्तान अतीत में इन्हीं नीतियों पर चला है, जिसे वह ‘‘सामरिक पकड़’’ कहता है और उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि उसे काबुल में भारत से प्रभावित सरकार से घिरने का खतरा था। खान ने इस बात पर भी जोर दिया कि अब ऐसी कोई नीति नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘अब पाकिस्तान में ‘सामरिक पकड़’ की कोई अवधारणा नहीं है, क्योंकि हमें लगता है कि अफगानिस्तान में हस्तक्षेप करके... हमने वास्तव में अपने ही देश का काफी नुकसान किया है।’’

All the updates here:

प्रमुख खबरें

Iran कर रहा ताबड़तोड़ हमला! अब तुर्की की ओर दाग दी बैलिस्टिक मिसाइल, NATO ने हवा में कर दिया तबाह

12 देशों में America का एक्शन, अपने नागरिकों को मीडिल ईस्ट छोड़ने का निर्देश, बड़े हमले की तैयारी!

Nepal Election: Gen-Z तय करेगी किसकी बनेगी सरकार? KP Oli और Prachanda की बढ़ी टेंशन

Google ने लॉन्च किया Nano Banana 2, जानें कैसे करें AI इमेज जनरेशन का इस्तेमाल