By अभिनय आकाश | May 19, 2025
पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने कई देशों में प्रतिनिधिमंडल भेजने और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टालरेंस की नीति और पहलगाम आतंकवादी हमलेपर अपने रुख के साथ-साथ सबूत पेश करने का फैसला किया था। भारत की ओर से इसके लिए सबसे अहम नाम कांग्रेस सांसद शशि थरूर का है। भारत के बाद पाकिस्तान ने भी इसी तरह का डेलीगेशन बनाया है, जो दुनिया में ये कहेगा कि गड़बड़ दरअसल दिल्ली की ओर से हो रही है। पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार ने इसके लिए बिलावल भुट्टो जरदारी को चुना है। लेकिन बिलावल भुट्टो क्या शशि थरूर जैसा प्रभाव दुनिया के नेताओं के सामने दिखा पाएंगे। इसमें खुद पाकिस्तानियों को ही संदेह है।
इसके विपरीत, अनुभवी सांसद और संयुक्त राष्ट्र के पूर्व अवर महासचिव शशि थरूर भारत की परमाणु-प्रथम-उपयोग-नहीं नीति को प्रभावी ढंग से व्यक्त कर सकते हैं और एक संतुलित लेकिन दृढ़ रुख बनाए रख सकते हैं। ऑपरेशन सिंदूर के तहत विभिन्न दलों के भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने वाले थरूर राष्ट्रीय एकता को दर्शाते हैं। पाकिस्तानी-अमेरिकन मोइद पीरजादा का कहना है कि 70 साल के थरूर की दुनियाभर के विदेश नीति एक्सपर्ट से संबंध रहे हैं। वह निजी तौर पर भी दुनिया की बड़ी हस्तियों को जानते हैं और सरकारों में बैठे लोगों से संबंध रखते हैं। इसके साथ ही थरूर को 'विदेश नीति का बाज़' बताया। उन्होंने बिलावल भुट्टो को 'नकलची बंदर' कहते हुए उनकी विदेश नीति में अनुभवहीनता पर सवाल उठाया।
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