By अजय कुमार | Apr 22, 2024
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी से नाता तोड़कर अपना दल कमेरावादी की पल्लवी पटेल द्वारा असदुद्दीन ओवैसी से हाथ मिलाने के बाद भी पल्लवी की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। ओवैसी के साथ मिलकर बनाए गए पीडीएम (पिछड़ा दलित मुस्लिम) न्याय मोर्चा को पहली चोट तब लगी जब ओवैसी ने प्रदेश में अपने सिंबल पर प्रत्याशी खड़े करने से इनकार कर दिया। ऐसा इसलिये हुआ क्योंकि ओवैसी अपने संसदीय क्षेत्र हैदराबाद में ही बुरी तरह से घिर गये हैं। भाजपा प्रत्याशी उन्हें हैदराबाद में कड़ी चुनौती दे रही हैं, जिसके चलते ओवैसी के चुनाव हारने तक की चर्चा चल रही है। अपना दल कमेरावादी को दूसरी ‘चोट’ चुनाव चिह्न को लेकर लगी है। चुनाव आयोग ने अपना दल कमेरावादी द्वारा योगदान रिपोर्ट व वार्षिक आय-व्यय का ब्यौरा न देने के कारण उसका चुनाव चिह्न ‘लिफाफा‘ आवंटित नहीं किया है। पार्टी चुनाव चिह्न आवंटित करने के लिए हाई कोर्ट गई, किंतु वहां उसकी याचिका खारिज हो गई।
इन झटकों के बीच पीडीएम न्याय मोर्चा ने सात और प्रत्याशियों की दूसरी सूची रविवार को जारी कर दी। संसदीय सीट उन्नाव से धनीराम पाल, कन्नौज से डॉ. दानिश अली, कानपुर नगर से राम आसरे पाल, गाजीपुर में सूबेदार बिंद, घोसी से प्रेमचन्द्र, सीतापुर से मो. काशिफ अंसारी व इलाहाबाद (प्रयागराज) से हंसराज कोल शामिल हैं।