Paramahansa Yogananda Birth Anniversary: भारतीय योगी और आध्यात्मिक गुरु थे परमहंस योगानंद, छोटी उम्र में हुआ था आध्यात्मिक अनुभव

By अनन्या मिश्रा | Jan 05, 2026

भारत के पहले योगगुरु परमहंस योगानंद का 05 जनवरी को जन्म हुआ था। पश्चिमी देशों में योगानंद को योग के पिता के रूप में पहचान मिली। महज 17 साल की उम्र में परमहंस योगानंद ने ईश्वर की खोज के लिए अपनी आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत की थी। योगानंद ने खुद को सभी जातियों, धर्मों और राष्ट्रीयताओं के बीच अधिक सद्भाव और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए समर्पित किया। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर योग गुरु परमहंस योगानंद के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक तथ्यों के बारे में...

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मां काली का ध्यान करते थे परमहंस योगानंद

बचपन से ही मुकुंदघोष मां काली की गहन प्रार्थना और ध्यान किया करते थे। ऐसे में एक मौके पर मुकुंदघोष एक गहन दिवास्वप्न में डूब गए। उनकी अंतर्दृष्टि के सामने एक प्रखर प्रकाश कौंध गया। वह इस दिव्य प्रकाश को देखकर हैरान रह गए और उन्होंने पूछा कि क्या यह अद्भुत आलोक है। इस प्रश्न के उत्तर में उनको एक प्रत्युत्तर प्राप्त हुआ, 'मैं ईश्वर हूं.मैं प्रकाश हूं।' उन्होंने अपनी पुस्तक 'योगी कथामृत' में इस अलौकिक अनुभव का वर्णन किया है।

फिर साल 1920 में बोस्टन में धर्म की अंतर्राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में शामिल होने के लिए अमेरिका चले गए। फिर वह 5 साल माउंट वाशिंगटन, लॉस एंजिल्स में आत्मनुभूति अपने मुख्यालय के साथ फैलोशिप की स्थापना की। इसके बाद वह साल 1952 तक अमेरिका में रहे। लेकिन इस बीच वह भारत भी लौटे, लेकिन फिर वह अमेरिका चले गए। साल 1935 में परमहंस योगानंद एक साल के लिए भारत आए और यहां पर उन्होंने अपने इंस्टीट्यूट और गुरु के काम को आगे बढ़ाने का काम किया।

पश्चिमी देशों में पहुंचाया योग

परमहंस योगानंद पहले थे, जिन्होंने पश्चिमी देशों में भारतीय योग को पहुंचाया। पश्चिमी देशों में योगानंद को योग के पिता के रूप में पहचान मिली। योगानंदजी ने अपनी प्रसिद्ध आत्मकथा में भारत के महान योगी के साथ अपने आध्यात्मिक अनुभवों को बताया है। परमहंस योगानंद की किताब 'ऑटोबायोग्राफी ऑफ ए योगी' दुनिया की सबसे बड़ी आध्यात्मिक किताब बन गई।

मृत्यु

वहीं अमेरिका में 07 मार्च 1952 को परमहंस योगानंद भारत के राजदूत बिनय रंजन पत्नी के साथ लॉस एंजिल्स के होटल में खाने पर गए थे। इसके बाद उन्होंने दुनिया की एकता पर भाषण दिया। फिर इसी दिन यानी की 07 मार्च 1952 को परमहंस योगानंद ने अपनी देह त्याग दी।

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