By रेनू तिवारी | Jul 17, 2026
देश की राजधानी दिल्ली में राजनीतिक सरगर्मियां चरम पर हैं, क्योंकि संसद का आगामी मॉनसून सत्र सोमवार (20 जुलाई) से शुरू होने जा रहा है। इस सत्र को लेकर सत्ताधारी एनडीए (NDA) और विपक्ष दोनों ही अपनी-अपनी रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। जहां एक तरफ विपक्ष बेरोजगारी, बेकाबू महंगाई और NEET पेपर लीक जैसे ज्वलंत मुद्दों पर सरकार को चौतरफा घेरने की तैयारी कर रहा है, वहीं केंद्र सरकार अहम विधायी कार्यों और मुख्य कानूनों को बिना किसी बाधा के पारित कराने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इस बीच, सत्र के दौरान पेश होने वाले संभावित बिलों की आधिकारिक सूची सामने आ चुकी है।
ANI के अनुसार, सरकार मॉनसून सत्र के दौरान लोकसभा में निम्नलिखित पांच नए बिल पेश करने पर विचार कर रही है:
इनकम टैक्स (संशोधन) बिल, 2026 - एक अध्यादेश की जगह लेने के लिए।
सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन बिल, 2026 - एक अध्यादेश की जगह लेने के लिए।
जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) बिल, 2026।
राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) बिल, 2026।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) बिल, 2026।
उम्मीद है कि ये बिल सत्र के दौरान सरकार के विधायी एजेंडे का मुख्य हिस्सा होंगे।
सरकार के एजेंडे में दो लंबित बिल भी शामिल हैं
नए कानूनों के अलावा, केंद्र सरकार उन दो बिलों पर भी विचार कर सकती है जो पहले से ही संसद में लंबित हैं: विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन बिल, 2026, जिसे 25 मार्च, 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था। विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान बिल, 2025, जिसे 15 दिसंबर, 2025 को पेश किया गया था और बाद में आगे की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति को भेजा गया था।
परिसीमन और 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' चर्चा के मुख्य विषय बने हुए हैं
हालांकि सरकार की आधिकारिक विधायी सूची में परिसीमन बिल या 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' बिल शामिल नहीं है, लेकिन सत्र से पहले ये दोनों प्रस्ताव राजनीतिक चर्चा के सबसे बड़े विषय बन गए हैं। विपक्षी दलों का मानना है कि केंद्र सरकार इन कानूनों को पेश करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। कांग्रेस पहले ही साफ़ कर चुकी है कि अगर संसद में परिसीमन (delimitation) की प्रक्रिया का बिल लाया जाता है, तो वह इसका विरोध करेगी।
सरकार और विपक्ष की रणनीति बैठकें
सरकार की तैयारियों के तहत, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शुक्रवार सुबह 11 बजे अपने आवास पर मंत्रियों के समूह (GoM) की एक अहम बैठक की अध्यक्षता करेंगे। उम्मीद है कि इस बैठक में मॉनसून सत्र के लिए तालमेल और विधायी रणनीति पर चर्चा होगी। दूसरी ओर, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने भी अपनी तैयारियां तेज़ कर दी हैं। कई आंतरिक बैठकें पहले से ही चल रही हैं, और संसद के दोबारा शुरू होने से एक दिन पहले, 19 जुलाई को विपक्षी दलों की एक संयुक्त बैठक बुलाई गई है।
मॉनसून सत्र से क्या उम्मीदें हैं
आने वाले सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिल सकती है। जहां सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी, वहीं विपक्ष महंगाई, बेरोज़गारी, परीक्षा में गड़बड़ियों और जनता से जुड़े अन्य मुद्दों को उठा सकता है, जिससे संसद में राजनीतिक माहौल गरमा सकता है।