By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Sep 23, 2020
नयी दिल्ली। संसद ने बुधवार को जम्मू-कश्मीर आधिकारिक विधेयक-2020 को मंजूरी प्रदान कर दी जिसमें पांच भाषाओं हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू, कश्मीरी और डोगरी को केंद्र शासित प्रदेश की आधिकारिक का दर्जा देने का प्रावधान है। विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि जम्मू कश्मीर के 74 प्रतिशत लोगों की कश्मीरी और डोगरी है किंतु इन भाषाओं को 70 साल तक राज्य की आधिकारिक नहीं बनाकर लोगों को उनकी आकांक्षाओं से वंचित रखा गया। बहरहाल, गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि इस विधेयक के माध्यम से कश्मीरी, डोगरी, उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी भाषाओं को जम्मू-कश्मीर की आधिकारिक घोषित किया जाएगा।
इससे पहले रेड्डी ने कहा कि 70 साल से उर्दू जम्मू कश्मीर की आधिकारिक है लेकिन जम्मू-कश्मीर में उर्दू बोलने वाले लोग 0.16 प्रतिशत ही हैं। उन्होंने कहा कि उर्दू और अंग्रेजी दोनों को आधिकारिक के तौर पर जारी रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि डोगरी वहां दूसरी सबसे अधिक बोली जाने वाली है। मंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पंजाबी बोलने वाले लोगों की संख्या1.78 प्रतिशत है। इसलिए इस को बढ़ावा देने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार किसी भी क्षेत्रीय के खिलाफ नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य में बोले जानी वाली पंजाबी, गुज्जरी और पहाड़ी के विकास के लिए विधेयक में कई प्रावधान किये गये हैं।
उच्च सदन में विधेयक पर चर्चा में भाग लेते हुए पीडीपी के मीर मोहम्मद फैज ने कहा कि इसमें पंजाबी, गुज्जरी और पहाड़ी को भी शामिल किया जाए। भाजपा के एस एस नागर ने पंजाबी, गुज्जरी और पहाड़ी को इस सूची में शामिल करने की मांग का समर्थन किया। शिरोमणि अकाली दल के नरेश गुजराल ने कहा कि इस विधेयक में पंजाबी को शामिल नहीं किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के संविधान में भी पंजाबी एक आधिकारिक थी। उन्होंने इस विधेयक में पंजाबी को शामिल करने की मांग की। भाजपा के शमशेर सिंह मन्हास ने विधेयक में डोगरी को आधिकारिक बनाने के प्रस्ताव का स्वागत किया।