By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 08, 2026
नयी दिल्ली, सात अगस्त संसद की एक समिति ने सिफारिश की है कि मौजूदा भू-राजनीतिक स्थिति और “हर समय विश्वसनीय युद्धक क्षमताओं को बनाए रखने” की आवश्यकता को देखते हुए रक्षा क्षेत्र के लिए पूंजीगत मद में बजट आवंटन बढ़ाया जाना चाहिए। रक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति की यह रिपोर्ट शुक्रवार को संसद में प्रस्तुत की गई। समिति ने अपनी इस रिपोर्ट में यह भी कहा है कि वह “मंत्रालय (रक्षा मंत्रालय) की इस बात से सर्वसम्मति से सहमत है कि रक्षा बलों के कर्मियों को दी जाने वाली दिव्यांगता पेंशन पर आयकर से छूट का मामला वित्त मंत्रालय के दायरे में आता है।” हालांकि, समिति ने सशस्त्र बलों के कर्मियों को दी जाने वाली दिव्यांगता पेंशन पर आयकर छूट से जुड़े संशोधनों पर “चिंता” व्यक्त की है।
समिति ने एक अन्य रिपोर्ट में कहा कि रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) महिला कर्मचारियों को समान अवसर प्रदान करता है और इसके पास एक सुस्थापित शिकायत निवारण तंत्र मौजूद है। हालांकि, उसने सिफारिश की कि “शिकायत तंत्र को मजबूत करने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाने चाहिए” तथा कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न निवारण अधिनियम के तहत शिकायतों से निपटने के संबंध में मानक संचालन प्रक्रिया का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। समिति ने कहा कि वह इस अधिनियम के तहत शिकायतों के समय पर निवारण के लिए आंतरिक शिकायत समिति, प्रत्येक लैब में नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की भूमिका की सराहना करती है।
रिपोर्ट में समिति ने इच्छा जताई कि परियोजनाओं के समय पर पूरा होने, धन के उचित उपयोग और लागत वृद्धि पर काबू के लिए डीआरडीओ द्वारा उठाए गए कदमों से अवगत कराया जाए। रिपोर्ट में कहा गया कि समिति इस सिफारिश को दोहराती है कि डीआरडीओ को लागत दक्षता, तकनीकी परिपक्वता, लक्ष्य तिथियों, पूर्णता समय और परिचालन प्रभावशीलता को कवर करने वाले प्रमुख निष्पादन संकेतक (केपीआई) को शीघ्रता से अंतिम रूप देकर अधिसूचित करना चाहिए। समिति ने यह भी कहा कि उसने मंत्रालय के जवाब से यह नोट किया है कि पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के लाभ के लिए पूर्व सैनिक कल्याण विभाग द्वारा विभिन्न कल्याणकारी उपाय और पहल शुरू की गई हैं, जिसमें वित्तीय सहायता में वृद्धि, कानूनी सहायता को मजबूत करना, एकीकृत सैनिक परिसरों की स्थापना और हितधारकों के साथ नियमित परामर्श शामिल हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, ये पहल वास्तव में सराहनीय हैं और पूर्व सैनिक समुदाय के लिए कल्याणकारी पारिस्थितिकी तंत्र में सुधार की दिशा में मंत्रालय की प्रतिबद्धता तथा निरंतर प्रयासों को दर्शाती हैं। इसमें कहा गया, “समिति इस संबंध में अपनी पिछली सिफारिश को दोहराती है और चाहती है कि मंत्रालय देश भर के पेशेवर कॉलेजों में रक्षा कर्मियों के बच्चों के लिए आरक्षण बढ़ाने तथा अवसरों के विस्तार की संभावना की जांच करने के लिए शिक्षा मंत्रालय, राज्य सरकारों, पेशेवर नियामक निकायों और अन्य संबंधित हितधारकों के परामर्श से प्रस्तावित व्यापक अध्ययन शुरू कर सकता है।