By अनन्या मिश्रा | Apr 19, 2026
वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। लेकिन भगवान परशुराम का जन्म संध्या काल यानी की प्रदोष काल में हुआ था। परशुराम भगवान विष्णु के छठे अवतार माने जाते हैं। इस बार आज यानी की 19 अप्रैल को परशुराम जयंती मनाई जा रही है। भगवान परशुराम ने अधर्म और बुराई को खत्म करने के लिए धरती पर जन्म लिया था। उन्होंने अत्याचारी और अधर्मी राजाओं का नाश किया था और पृथ्वी पर फिर से सत्य और धर्म का मार्ग स्थापित किया था।
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि करने के बाद साफ कपड़े पहनें। अब भगवान परशुराम की प्रतिमा या तस्वीर को स्थापित करें। इसके बाद भगवान परशुराम को चंदन का तिलक करें। इसके बाद पुष्प, अक्षत, धूप-दीप और तुलसी दल अर्पित करें। फिर फल या मिठाई का भोग लगाएं। इसके बाद परशुराम स्तुति या मंत्रों का पाठ करें और पूजा के अंत में आरती करें। वहीं इस दिन दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है।
भगवान परशुराम को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। वह अन्याय के नाश के लिए आए थे। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से साहस, आत्मविश्वास और पराक्रम में वृद्धि होती है। अक्षय तृतीया पर होने की वजह से इस दिन की पूजा का फल कभी नष्ट नहीं होता है।