क्यों किया था प्रधानमंत्री ने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाने का ऐलान

By कमलेश पांडे | Aug 13, 2022

भले ही 15 अगस्त 1947 को भारत आजाद हुआ, लेकिन इससे पहले 14 अगस्त 1947 को विभाजित भारत से पाकिस्तान का जन्म हुआ और इसी दिन पश्चिमी और पूर्वी पाकिस्तान के मुस्लिम बहुल इलाकों में भयानक दंगे हुए, जहां हिंदुओं का कत्लेआम हुआ। यही वजह है कि रविवार 15 अगस्त 2021 को भारत की आजादी की 75वीं वर्षगांठ मनाने से एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को बताया कि आज से प्रतिवर्ष 14 अगस्त को 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' के तौर पर मनाने का निर्णय लिया गया है। 

बता दें कि अंग्रेजों द्वारा भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के समय 14 अगस्त 1947 को ही बंगाल, बिहार और पंजाब में भयानक सांप्रदायिक दंगे हुए थे। जिनमें तकरीबन 2.5 लाख से 10 लाख लोग मारे गए थे। खास बात यह कि इन सांप्रदायिक दंगो को रोकने के लिए उस वक्त महात्मा गांधी बंगाल के नोआखली में अनशन पर बैठ गए थे और स्वतंत्रता दिवस समारोह में भी शामिल नहीं हुए थे। जिसके चलते वह समारोह भी फीका लगने लगा था।

इसे भी पढ़ें: 15 अगस्त की तारीख आजादी के लिए क्यों चुनी गई, जानें राष्ट्रीय पर्व से जुड़ी बड़ी बातें

उल्लेखनीय है कि भारत 15 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है, वहीं पाकिस्तान 14 अगस्त को अपनी आजादी का दिवस मनाता है। दरअसल, 14 अगस्त को ही गुलाम भारत के दो टुकड़े हुए थे और एक नए मुल्क पाकिस्तान का जन्म हुआ था। इसी के साथ भारत को भी अंग्रेजों द्वारा आजाद घोषित कर दिया गया था। पाकिस्तान को 1947 में ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन द्वारा भारत के विभाजन के बाद एक मुस्लिम देश के रूप में तराशा गया था। जिसके चलते न केवल लाखों लोग विस्थापित हुए थे बल्कि बड़े पैमाने पर दंगे भड़कने के कारण कई लाख लोगों की जान चली गई थी।

बता दें कि 15 अगस्त की सुबह भी ट्रेनों, घोड़े-खच्चर और पैदल ही लोग अपनी ही मातृभूमि से विस्थापित होकर एक-दूसरे के बन चुके अपने अपने देश जा रहे थे। मतलब कि पाकिस्तान से हिंदुस्तान और हिंदुस्तान से पाकिस्तान आने वालों के चेहरों से सारे रंग गायब थे। बताया जाता है कि इसी बीच बंटवारे के दौरान दोनों तरफ भड़के दंगे और हिंसा में लाखों लोगों की जान चली गईं। कुछ रिपोर्ट्स में यह आंकड़ा 20 लाख तक भी बताया गया है। यह तत्कालीन प्रशासन पर किसी कलंक से कम नहीं है, क्योंकि बिना सोचे-समझे आनन-फानन में सबकुछ किया गया, जिसकी कीमत आम लोगों ने अपने धन-जन को खोकर चुकाई।

बता दें कि जब पाकिस्तान 14 अगस्त को भारत से अलग हुआ था, तब स्वतंत्रता संग्राम के सियासी सेनानियों ने कहा था कि देश के नागरिक जो पाकिस्तान के साथ रहना चाहते हैं, वो रह सकते हैं और जो भारत के साथ रहना चाहते हैं वो भी रह सकते हैं। हालांकि, पाकिस्तान ने उस दौरान तो इस समझौते को स्वीकार कर लिया था। लेकिन इसके अगले ही दिन पाकिस्तान का क्रूर चेहरा सामने आया। वहां से आने वाली ट्रेनों पर जब हिंदुओं-सिखों की लाशें आने लगी, तो भारत वासी सन्न रह गए और भारतीय राजनेता अचंभित। लेकिन अब कुछ किया नहीं जा सकता था। इसलिए महात्मा गांधी नोआखाली पहुंच गए।

- कमलेश पांडेय

वरिष्ठ पत्रकार व स्तम्भकार

प्रमुख खबरें

City of Thousand Temples: भारत की City of Thousand Temples, जानिए क्यों है इतनी खास यह नगरी

250 साल पहले कैसे आजाद हुआ अमेरिका, बिखरी हुई कंगाल कॉलोनी के दुनिया की सबसे बड़ी ताकत को हराने की कहानी

EPFO New Rules: PF क्लेम में देरी पर Officer की कटेगी Salary, लगेगा 12% का भारी जुर्माना

पैपराज़ी ने छीना स्टारडम का ग्लैमर, Saif Ali Khan का फूटा गुस्सा, चौबीसों घंटे कैमरों के पहरे पर जताई गहरी नाराजगी