By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 17, 2026
पटना उच्च न्यायालय ने बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम (बीसीसीए) के तहत दो लोगों को ‘असामाजिक तत्व’ घोषित कर उनकी आवाजाही पर लगाए गए प्रतिबंध संबंधी आदेश रद्द करते हुए कहा कि नालंदा जिला प्रशासन ने उचित सत्यापन के बिना कार्रवाई की थी। अदालत ने राज्य सरकार को दोनों याचिकाकर्ताओं को एक-एक लाख रुपये हर्जाना प्रदान करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति सुनील दत्त मिश्रा की खंडपीठ ने 11 सितंबर के अपने आदेश में मुकदमेबाजी के कारण हुए खर्च की भरपाई के रूप में दोनों याचिकाकर्ताओं को 10-10 हजार रुपये देने का भी निर्देश दिया।
अदालत ने कहा, “एसडीपीओ की रिपोर्ट के आधार पर नालंदा के एसपी ने याचिकाकर्ताओं को असामाजिक तत्व घोषित करने की संस्तुति की, जिसके परिणामस्वरूप उनके खिलाफ बीसीसीए वाद संख्या 178/2025 और 183/2025 दर्ज किए गए।” अदालत के अनुसार, मामले दर्ज होने के बाद नालंदा के जिलाधिकारी (डीएम) ने 10 सितंबर, 2025 को दोनों को कारण बताओ नोटिस जारी किया। खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा कि जिलाधिकारी ने यह कहते हुए कार्रवाई की कि याचिकाकर्ता अपने बचाव में कोई ठोस सामग्री प्रस्तुत नहीं कर सके और उनकी स्वतंत्र आवाजाही से क्षेत्र में कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो सकती है।