By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 14, 2026
पटना उच्च न्यायालय ने एक विधवा से दुष्कर्म के प्रयास के मामले में एक व्यक्ति की दोषसिद्धि रद्द करते हुए उसे महिला की मर्यादा भंग करने के इरादे से हमला करने का दोषी ठहराया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष के साक्ष्य दुष्कर्म के प्रयास को साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं। न्यायमूर्ति संदीप कुमार की एकल पीठ ने आठ अक्टूबर को मोहम्मद ऐनुल हक की आपराधिक अपील पर फैसला सुनाते हुए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376/511 के तहत दुष्कर्म के प्रयास की दोषसिद्धि रद्द कर दी।
आरोप के अनुसार, आरोपी रात में विधवा के घर में घुसा, दीया बुझाया और उसके ऊपर लेट गया, उसकी चीख दबाने के लिए महिला का मुंह बंद कर दिया। महिला के शोर मचाने पर ग्रामीण पहुंचे और आरोपी को पकड़ लिया। उच्च न्यायालय ने कहा कि पीड़िता की गवाही आरोपी के घर में घुसने, दीया बुझाने और उसके ऊपर लेटने के संबंध में विश्वसनीय है।
हालांकि, दुष्कर्म के प्रयास को साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। कपड़े उतारने या यौन संबंध बनाने के लिए प्रवेश का प्रयास करने जैसी गतिविधि भी साबित नहीं हुई। अदालत ने आरोपी की उम्र, पूर्व आपराधिक रिकॉर्ड नहीं होने और 13 वर्ष से अधिक समय तक जेल में रहने ध्यान में रखते हुए दोनों अपराधों की सजा उसके द्वारा पहले ही काटी जा चुकी कारावास की अवधि तक सीमित कर दी।
साथ ही, उसे आठ सप्ताह के भीतर 25,000 रुपये जुर्माना जमा करने का निर्देश दिया। यह राशि पीड़िता को मुआवजे के रूप में दी जाएगी। जुर्माना नहीं भरने पर उसे छह महीने का साधारण कारावास भुगतना होगा।