शोर और रफ्तार थम गयी...जान बचाने के लिए घर बैठे तो समझ आया जीवन

By संजय तिवारी | Mar 31, 2020

हवा शुद्ध है। शोर थम गया। रफ्तार पाबंद। नीरवता समझ में आ रही। सन्नाटा कैसे बुना जाता है, यह भी समझ में आ रहा। आदमी, मानव, मनुष्य, मानुस, व्यक्ति, राजा, प्रजा, सेना, वैद्य, मंत्री, राज पुरुष, लोक, लोक जीवन, नगरीय जीवन, कस्बाई जीवन, श्रमिक, व्यवसायी, उद्योगपति, नौकरी, चाकरी, मजदूरी, दिहाड़ी, शासन, सत्ता, आदेश, निर्देश, आचरण, सभ्यता, संस्कृति, विकृति, आचार, आहार, व्यवहार, विहार, सुख, दुख, जीवन, मरण, सांस प्रच्छवास, गति, तेजी, ठहराव, रफ्तार, ऐश्वर्य, वैभव, आनंद, बेचैनी, व्याकुलता, रिश्ते, नाते, संबंध, समस्या, समाधान, सैनिक, असैनिक, राजकोष, निजी कोष, धन, दौलत, प्रतिष्ठा, औकात, सीमा, अभिव्यक्ति, आसक्ति, अनासक्ति, अभिमान, अनुमान, ईमानदार, बेईमान, ठग, संन्यासी, साधु, असाधु, भिखारी, भिक्षुक, जरूरत, ग़ैरजरूरत, अपने, पराए, आदर्श, अनादर्श, औषधि, अनौषधि, आवश्यकता, अतिरेक, सुविधा, असुविधा, ज्ञान, अज्ञान, शिक्षा, अशिक्षा, स्कूल, विद्यालय, विश्वविद्यालय, आलय, अनाथालय, आवश्यक, अनावश्यक। 

बहुत ही कम दिनों में समझ में तो आने ही लगा है। मृत्यु और रोग के भय ने कैसे सभी को ज्ञानी बनाना शुरू कर दिया है। जो जितना सुविधा सम्पन्न और ऐश्वर्यशाली है वह उतना ही डरा हुआ है। सभी दुबक गए हैं। विवशता ही सही, मानव निर्मित विकृतियों से प्रकृति को थोड़ी राहत तो अवश्य मिली है।

अब हवा चलती है तो पता चल रहा है। पानी गिरता है तो पता चल रहा है। कोई पड़ोस से गुजर रहा है तो पता चल रहा है। कोई चिड़िया बोल रही है तो पता चल रहा है। कुत्तों, पशुओं, चिड़ियों की आवाज में भूख, प्यास, बेचैनी का पता चल रहा है। पड़ोस में कोई भूखा है तो पता चल रहा है। कोई बीमार है तो पता चल रहा है। थोड़ी थोड़ी संवेदना जगने लगी है। मशीनी जिंदगी की जरूरत पर विराम से लगने लगा है। घरों में कोलाहल भी है, घबराहट भी है और सामूहिकता भी। हालांकि यह सब कुछ ही दिनों के लिए है लेकिन इसका असर बहुत गहरा और लंबा होगा, यह मेरा दावा है। युद्ध, आपदा, विपत्ति, अव्यवस्था से ही जीवन के उस अतिरेक से मुक्ति का मार्ग निकलता है जिसको हम अपनी सुविधा सम्पन्नता के लिए अंगीकार करते रहते हैं। आप खुद से पूछिए, आपकी महँगी गाड़ियां, बैंक की अकूत राशि, सोने, चांदी, जवाहरात, महँगी सुविधा, महंगी जरूरते, महँगे समान आपको इस समय काट नहीं रहे ? कल्पना कीजिये यही अवस्था साल दो साल रही तो ? 

हम सब तो भूल गए थे। घर, खेत, खलिहान, खलिहानी, मेह, दवरी, ओसावन, राशि। बगीचे तो कब के लील गए। बीजू वृक्ष गायब। पीपल ,पाकड़, बरगद, बकाइन, नीम, फरहद, गूलर, जामुन, महुआ, सेमर, खैर, सीहोर, शीशम, साखू, रूनी, रहिला। इनमें से क्या याद है। क्या पहचान सकते हैं आप। क्या क्या पहली बार देख रहे है। जाहिर है जो महानगरों में जो कैद हैं उन्हें अब भी यह सब कुछ नहीं दिख रहा होगा, ना ही समझ में आ रहा होगा। जो अर्द्ध शहरी स्थानों पर फंसे हैं उन्हें सिर्फ याद भर आ रही होगी। जो कस्बों और गांवों में रह गए हैं उन्हें मजा ही आ रहा होगा।

दिक्कत वे महसूस कर रहे जिनको घर में रहने की न आदत रही न उन्हें घर जैसा कुछ याद ही रह गया। वे तो देर रात सोने और सुबह बाथरूम जाने के अलावा वर्षों से कुछ और समझ ही नहीं पाए। दिन भर उड़ते, रफ्तार लेते, मीटिंग, सेटिंग और सिटिंग करते, रात का अंधेरा होने पर मेजें सजाकर बैठने के अलावा उन्हें कहां पता कि जिंदगी में जिंदगी किस कोने में रहती है। नौकर, चाकर, सॉफर, ड्राइवर, चपरासी, सहायक, सीए के साथ रात दिन एक करने के बाद भी नींद के उपाय तलाशने पड़ते थे।

इसे भी पढ़ें: कोरोना के खात्मे की प्रयोगभूमि बनेगा भारत, बस सबके साथ की जरूरत है

आजकल नींद भी आ रही और बेचैनी भी कम है। कोई तनाव भी नहीं क्योंकि तनाव के हर काम पर बंदी है। अब केवल दो समय की रोटी, पीने के पानी, जीवन की अनिवार्य जरूरतों और अपनों के सुरक्षित रहने भर की चिंता है। कहीं जाना नहीं, किसी को आना नहीं, कोई मीटिंग नहीं, कोई सिटींग नहीं, कोई उलझन नहीं। सुबह से शाम तक जीवन में रहने का आचरण। जीवन के प्रति चिंता और जीवित रहने के प्रबंध। पता चल गया कि जीवन के लिए सबसे जरूरी है जीवन। जीवन के लिए जीने के साधन बहुत कम होते हैं। इनमें शुद्ध वायु, शुद्ध जल, शुद्ध विचार, शुद्ध आहार, शुद्ध व्यवहार, और संवेदना मूल तत्व हैं। यही तो सृष्टि आरंभ से कहती आ रही है। हम माने तो। मानना और न मानना हमारे हाथ। इसको विकृत करेंगे तो परिणाम यही होगा जो आज दिख रहा है। सृष्टि को प्रकृति तो बचाएगी ही।

-संजय तिवारी

प्रमुख खबरें

Animesh Kujur की तूफानी दौड़, National Record तोड़कर Commonwealth Games 2026 में बनाई जगह

Human Trafficking पर Supreme Court का ऑपरेशन क्लीन, राज्यों को 4 हफ्ते में AHTU बनाने का आदेश

IPL 2026: अर्श से फर्श पर Punjab Kings, लगातार 6 हार के बाद Lucknow के खिलाफ Playoff की आखिरी उम्मीद

Barcelona के कोच Hansi Flick का बड़ा बयान, Pep Guardiola हैं दुनिया के बेस्ट कोच