PoK के लोग भारत की तरह पाकिस्तान के दुश्मन, 14 नागरिकों की हत्या पर ख्वाजा आसिफ का शर्मनाक बयान

By अभिनय आकाश | Jul 29, 2026

पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर (PoK) में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ़ ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। सरकार की सख़्त कार्रवाई का बचाव करते हुए आसिफ़ ने कहा कि वे इस्लामाबाद के ख़िलाफ़ सड़कों पर उतरने वालों को भारत जैसे दुश्मन के तौर पर देखते हैं। एक स्थानीय टेलीविज़न चैनल से बात करते हुए आसिफ़ ने सरकार के कदमों का बचाव किया और भारत तथा PoK में प्रशासन के ख़िलाफ़ विरोध करने वालों के बीच कोई फ़र्क नहीं किया। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने कहा कि मैं प्रदर्शनकारियों को भारत जैसी ही श्रेणी में रखता हूँ और उन्हें भी भारत की तरह ही दुश्मन मानता हूँ।" उन्होंने प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत की संभावना को भी खारिज कर दिया और उन्हें "पाकिस्तान का दुश्मन" बताया।

प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई

JAAC के हज़ारों समर्थकों ने रावलकोट से मुज़फ़्फ़राबाद तक मार्च किया। वे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 विधानसभा सीटों को खत्म करने की मांग कर रहे थे। JAAC का कहना है कि इस व्यवस्था से POK के निवासियों के राजनीतिक अधिकार कमज़ोर होते हैं, क्योंकि इससे इस्लामाबाद की राजनीतिक पार्टियों को इस इलाके में सरकार बनाने की प्रक्रिया को प्रभावित करने का मौका मिलता है। प्रदर्शन के नेताओं का तर्क है कि POK की विधानसभा चुनने का अधिकार सिर्फ़ वहां रहने वाले लोगों को ही होना चाहिए। संगठन के अनुसार, लगभग 5,000 लोग एक शांतिपूर्ण मार्च में हिस्सा ले रहे थे, तभी पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। JAAC ने दावा किया कि उसके कम से कम 14 कार्यकर्ता मारे गए और दो दर्जन से ज़्यादा लोग घायल हुए। मरने वालों में JAAC के संस्थापक सदस्य उमर नज़ीर के छोटे भाई उस्मान नज़ीर भी शामिल थे। संगठन ने पाकिस्तानी सुरक्षाकर्मियों पर प्रदर्शनकारियों पर "बिना उकसावे के गोलीबारी" करने का आरोप लगाया। हालाँकि, पाकिस्तानी अधिकारियों ने बिल्कुल अलग बात कही।

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सरकार का दावा है कि प्रदर्शनकारियों के पास आधुनिक हथियार थे और उन्होंने सुरक्षाकर्मियों को निशाना बनाया था, जिसके जवाब में यह कार्रवाई की गई। इन अलग-अलग दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो पाई है। इससे PoK में तनाव और बढ़ गया है, जहाँ हफ़्तों से विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। कई रिपोर्टों के अनुसार, 5 जून को प्रदर्शन शुरू होने और उसके बाद सेना की कार्रवाई में 80 से ज़्यादा लोग मारे जा चुके हैं। ताज़ा हिंसा से पहले, लगभग 40 लोगों की मौत हो चुकी थी - जिनमें 34 प्रदर्शनकारी और छह सुरक्षाकर्मी शामिल थे।

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