मुख्यमंत्री पर व्यक्तिगत लांछन आपत्तिजनक, कार्रवाई के लिए नियम बनाए आयोगः भाजपा

By दिनेश शुक्ल | Oct 13, 2020

भोपाल। भारतीय जनता पार्टी के लीगल सेल ने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के बारे में की गई टिप्पणी को आपत्तिजनक बताते हुए ऐसे मामलों में कार्रवाई के लिए नियमों के प्रावधान का सुझाव निर्वाचन आयोग को दिया है। पार्टी के लीगल सेल के प्रतिनिधिमंडल ने डाक मतपत्रों के लिए समयसीमा बढ़ाने सहित अन्य बातों से संबंधित पांच सुझाव मंगलवार को चुनाव आयोग को सौंपे हैं। प्रतिनिधिमंडल में भारतीय जनता पार्टी विधि प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक एवं चुनाव प्रबंधन समिति के सदस्य संतोष शर्मा, निर्वाचन समिति के सदस्य एस.एस. उप्प्पल, ओमशंकर श्रीवास्तव आदि शामिल थे।

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प्रतिनिधिमंडल ने भारत निर्वाचन आयोग को दिए गए सुझाव में कहा कि दिनांक 11 अक्टूवर 2020 को अशोकनगर (म.प्र.) के राजपुर कस्बे में कांग्रेस के किसान मोर्चा अध्यक्ष दिनेश गर्जर ने पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ की उपस्थिति में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कहा ‘‘कि कमलनाथ देश में दूसरे नम्बर के उद्योगपति हैं,  शिवराज की तरह वो भूखे घर से नहीं है। ’’दिनेश गुर्जर का यह कथन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के व्यक्तिगत जीवन पर अत्याधिक आपत्तिजनक टिप्पणी है जो अक्षम्य है। प्रतिनिधिमंडल ने निर्वाचन आयोग से इस प्रकार के व्यक्तिगत लांछन लगाने वाले व्यक्तियों पर कठोर कार्यवाही करने का नियमों में प्रावधान करने का सुझाव दिया। प्रतिनिधिमंडल ने कोविड-19 के संबंध में भी चुनाव आयोग को सुझाव देते हुए कहा कि आयोग ने कोरोना के दृष्टिगत दिशा निर्देश दिए हैं। अगर मतदान केंद्र पर प्रत्येक मतदाता का टेंपरेचर चेक किए जाने पर यदि किसी मतदाता का टेंपरेचर अधिक आता है तो उसे टोकन देकर मतदान का अवसर देने का सुझाव दिया।

 

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प्रतिनिधिमंडल ने 28 विधानसभा उपचुनाव में ऐसे मतदाता जिनका टेंपरेचर प्रथम बार में ज्यादा आता है, को मतदान टोकन की व्यवस्था करने की बात कही।

एक अन्य सुझाव में कहा गया है कि चुनाव आयोग द्वारा विकलांग तथा कोविड के मरीज मतदाताओं को भी डाक मत देने का अधिकार दिया है, जो प्रथम बार आम जनता के लिए लागू हो रहा है।  जिसमें नामांकन की तिथि से 5 दिवस के अंदर पोस्टल मत के लिए आवेदन प्रस्तुत करने का अवसर प्रदान किया गया था, परंतु देखने में यह आया है कि उक्त दिशा निर्देश आमजन के पास नीचे तक पूर्णता नहीं पहुंच पाए हैं। पूर्व में तय समय सीमा 5 दिन को बढ़ाकर 10 दिवस किया जावे ताकि बुजुर्ग, दिव्यांग तथा कोविड-19 से पीड़ित मतदाताओं को मत देने का पूर्ण अधिकार बिना किसी बाधा के प्राप्त हो सके। प्रतिनिधिमंडल ने चुनावी खर्चों को लेकर भी आयोग को सुझाव देते हुए कहा कि आयोग द्वारा जो वस्तुओं की दर निर्धारित की गई हैं,  उक्त दर वास्तविकता में बाजार में प्रचलन दरों से कहीं अधिक हैं। जिस कारण से प्रत्याशियों को अपने खर्चे में अत्याधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

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संबंधित निर्वाचन अधिकारी को निर्देश देकर सभी राजनीतिक दलों के साथ बैठकर तथा व्यापारी वर्ग के साथ बैठकर उक्त संबंध में पुनः नई रेट लिस्ट जारी करने के निर्देश देवें। सुझाव में कहा गया है कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा समय-समय पर कई विषयों पर परिपत्र जारी किये जाते हैं। कई बार एक ही विषय पर विभिन्न दिनांकों मे परिपत्र जारी हो जाते हैं,  जिनके पूर्व में जारी परिपत्रों के निरस्त नहीं किया जाता है। ऐसे मे संशय की स्थिति निर्मित हो जाती है। अद्यतन स्थिति में जारी परिपत्रों में यह उल्लेख हो कि उस विषय पर पूर्व में जारी परिपत्रों को निरस्त करते हुए यह परिपत्र जारी किया गया है।

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