E20 पेट्रोल को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका, सादे पेट्रोल का विकल्प देने की मांग

By अभिनय आकाश | Jul 10, 2026

देश में E20 (20% एथिल अल्कोहल मिश्रित) पेट्रोल की अनिवार्य उपलब्धता के खिलाफ वाहन चालकों ने बिना मिश्रण वाले सादे पेट्रोल का विकल्प देने की मांग की है। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें उपभोक्ताओं को अपनी पसंद का ईंधन चुनने का अधिकार देने की अपील की गई है। वाहन चालकों और विशेषज्ञों का दावा है कि E20 ईंधन से पुराने वाहनों के इंजन, पाइपलाइन और माइलेज पर बुरा असर पड़ रहा है। विपक्ष ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए ऑटोमोबाइल निर्माताओं से स्थिति स्पष्ट करने और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने की मांग की है। सरकार जहां पर्यावरण और विदेशी मुद्रा बचाने के लिए एथॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा दे रही है, वहीं यह विवाद नीति बनाम उपभोक्ता सुरक्षा की जंग बन गया है।

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क्या E20 का असर पुरानी गाड़ियों पर पड़ रहा है?

माइलेज की चिंता के अलावा, इथेनॉल की नमी सोखने की क्षमता (हाइग्रोस्कोपिक नेचर) के कारण लंबे समय तक इस्तेमाल से फ्यूल सिस्टम में जंग लगने का डर भी पैदा हो गया है। माना जाता है कि पुरानी गाड़ियों के रबर सील, होज़ और गैस्केट, जिन्हें शुरू में ज़्यादा इथेनॉल वाले मिश्रण के लगातार संपर्क में रहने के हिसाब से नहीं बनाया गया था, उनके भी समय से पहले खराब होने का खतरा ज़्यादा होता है। इन चिंताओं की वजह से 2023 से पहले की पेट्रोल गाड़ियों के कई मालिकों ने प्रीमियम फ़्यूल, खासकर इथेनॉल-फ़्री XP100 आज़माना शुरू कर दिया है। उन्हें उम्मीद है कि इससे माइलेज बेहतर होगा या लंबे समय में होने वाली टूट-फूट कम होगी, जबकि सरकार का कहना है कि E20 उन गाड़ियों के लिए सुरक्षित है जो इसके अनुकूल हैं।

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