ई20 पेट्रोल से पांच प्रतिशत तक घट सकती है माइलेज, लेकिन स्वच्छ दहन और ऊर्जा सुरक्षा के लाभ कहीं अधिक: पेट्रोलियम मंत्रालय

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Jul 10, 2026

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने कहा है कि 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई20) के इस्तेमाल से कुछ वाहनों में ईंधन दक्षता (माइलेज) तीन से पांच प्रतिशत तक कम हो सकती है। हालांकि, इसके बदले मिलने वाले लाभ जैसे कि बेहतर ऊर्जा सुरक्षा, कम कार्बन उत्सर्जन और सुधरा हुआ इंजन प्रदर्शन इस मामूली कमी की तुलना में कहीं अधिक महत्वपूर्ण हैं। मंत्रालय के अनुसार, इसके अतिरिक्त ऑक्टेन रेटिंग, बेहतर एंटी-नॉक क्षमता, तेज दहन और बेहतर पिकअप जैसे फायदे भी इस ईंधन से मिलते हैं।

मंत्रालय ने उन आशंकाओं को सिरे से खारिज कर दिया कि इस कार्यक्रम को बिना तैयारी के जल्दबाजी में लागू किया गया है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि भारत में एथनॉल मिश्रण की पहल साल 2001 में प्रायोगिक परियोजनाओं के साथ शुरू हुई थी और 2006 तक देश के कुछ हिस्सों में पांच प्रतिशत एथनॉल मिश्रण लागू हो चुका था। साल 2014 तक एथनॉल मिश्रण का स्तर केवल 1.5 प्रतिशत पर ही था, लेकिन 2018 में राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति लागू होने और गन्ने के अलावा अन्य कच्चे माल को शामिल किए जाने के बाद सरकार ने एथनॉल उत्पादन में तेजी लाई।

इसके बाद भारत ने निर्धारित समय से पहले ही साल 2022 में 10 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल कर लिया। एथनॉल उत्पादन संयंत्रों, भंडारण और लॉजिस्टिक्स में निवेश बढ़ाने के बाद, 2025-26 एथनॉल आपूर्ति वर्ष में 20 प्रतिशत मिश्रण का लक्ष्य भी प्राप्त कर लिया गया है। पुराने वाहनों को लेकर उठ रही चिंताओं पर मंत्रालय ने बताया कि ई20 को देशभर में लागू करने से पहले इंजन की टिकाऊ क्षमता, ईंधन प्रणाली, विभिन्न सामग्रियों के साथ अनुकूलता, जंग-रोधी क्षमता, वाहन संचालन और उत्सर्जन सहित अनेक पहलुओं पर व्यापक परीक्षण किए गए थे।

मारुति सुजुकी और हीरो मोटोकॉर्प सहित प्रमुख वाहन निर्माताओं से मिली प्रतिक्रिया के अनुसार, वास्तविक परिस्थितियों में चल रहे वाहनों में ई20 के उपयोग के कारण जंग लगने, असामान्य घिसाव या कलपुर्जों के जल्दी खराब होने की कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई है। इसके साथ ही मंत्रालय ने पेट्रोल पंपों पर शुद्ध पेट्रोल, ई10 और ई20 जैसी कई प्रकार की श्रेणियों के ईंधन उपलब्ध कराने की मांग को भी खारिज कर दिया। मंत्रालय के अनुसार, पूरे देश में समानांतर आपूर्ति श्रृंखला बनाए रखने से लॉजिस्टिक्स की लागत बढ़ेगी और एक लाख से अधिक खुदरा ईंधन केंद्रों पर वितरण व्यवस्था बेहद जटिल हो जाएगी।

कीमतों के संबंध में मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ई20 जरूरी नहीं कि पारंपरिक पेट्रोल से सस्ता हो। इसका कारण यह है कि किसानों को समर्थन देने के लिए एथनॉल की खरीद कीमत हमेशा लाभकारी स्तर पर तय की जाती है, और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत कम होने पर यह सामान्य पेट्रोल से महंगा भी पड़ सकता है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पेट्रोल पंपों पर कीमतें घटाना नहीं बल्कि आयातित कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता कम करना, कीमतों में स्थिरता लाना और देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करना है।

मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, साल 2014-15 के एथनॉल आपूर्ति वर्ष से अब तक एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम के कारण 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है। इससे कच्चे तेल के आयात की जरूरत में लगभग 316 लाख टन की कमी आई है, कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में करीब 952 लाख टन की कटौती दर्ज की गई है और देश के किसानों को 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया गया है। मंत्रालय ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे ई20 को लेकर फैलाई जा रही भ्रामक सूचनाओं से प्रभावित न हों, क्योंकि इसे पूरी तरह प्रमाणित करने के बाद ही बाजार में उतारा गया है।

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