By अनन्या मिश्रा | Mar 02, 2026
ब्रज की होली एक दिन का त्योहार नहीं बल्कि करीब 40 दिनों तक चलने वाला रंग, भक्ति और उत्साह का महापर्व है। होली का पर्व विशेष रूप से राधा-कृष्ण की लीलाओं, पारंपरिक आयोजनों और फाग गीतों से भरपूर होती है। ब्रज क्षेत्र मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के वृंदावन, मथुरा, बरसाना, नंदगांव जैसे स्थानों में फैला हुआ है। इस दौरान भव्य रूप से रंगों से सराबोर हो जाता है। ब्रज की होली की शुरूआत बसंत पंचमी से होती है।
25 फरवरी - बरसाना में लड्डू मार होली
26 फरवरी - बरसाना में लट्ठमार होली
27 फरवरी - नंदगांव में लट्ठमार होली
28 फरवरी - वृंदावन में फूलों की होली उत्सव
01 मार्च - गोकुल में छड़ी मार होली
02 मार्च - गोकुल में होली उत्सव
03 मार्च - होलिका दहन
04 मार्च - होली का पर्व
05 मार्च - दाऊजी मंदिर में हुरंगा होली उत्सव
होली के पर्व के दौरान रंग और पानी की वजह से दुर्घटनाओं का खतरा हो सकता है। इसलिए होली खेलने के दौरान सावधानी रखें। रंगों और पानी का उपयोग करते समय चेहरे और खासकर आंखों को बचाकर रखें।
बता दें कि ब्रज की होली एक सांस्कृतिक और धार्मिक पर्व है। इसलिए ब्रज के पारंपरिक आयोजनों और मान्यताओं का सम्मान करें।
होली खेलने के लिए पुराने और हल्के कपड़े पहनने चाहिए। क्योंकि कपड़ों में रंगों से दाग लग सकते हैं। वहीं हल्के कपड़े पहनें, जिससे कि ज्यादा रंग आपके शरीर पर न चिपके।
ब्रज में होली के समय गर्मी और अधिक भीड़ हो सकती है। इसलिए खुद को हाइड्रेटेड रखें और अधिक समय तक धूप में खड़े होने से बचें।
ब्रज की होली का धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है। इसलिए इसके पारंपरिक रूपों को समझने के लिए वहां की संस्कृति और इतिहास के बारे में जानना फायदेमंद रहेगा।
क्योंकि होली एक लोकप्रिय पर्व है, इसलिए ब्रज में जाने से पहले ही अपनी यात्रा और आवास बुक कर लें। जिससे कि आपको वहां पर पहुंचने के बाद कोई परेशानी न हो।
अगर आप भी ब्रज की होली के खास उत्सवों में भाग लेना चाहते हैं, तो पहले ही जानकारी कर लें कि कहां पर किस दिन कौन सा आयोजन हो रहा है।