Amarnath Yatra पर PM Modi का Special Message, श्रद्धालुओं को दिए ये 5 जरूरी संकल्प

By एकता | Jul 03, 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को अमरनाथ यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक खास मैसेज शेयर किया। उन्होंने इस यात्रा को भारत की संस्कृति और एकता का एक ऐसा हिस्सा बताया जो कभी खत्म नहीं हो सकता। पीएममोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि बाबा बर्फानी की यह यात्रा हमारी परंपराओं को जोड़ती है। उन्होंने दुआ की कि सभी शिव भक्तों की यह यात्रा सुरक्षित और बहुत अच्छी रहे।

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यात्रा को सफल बनाने वालों का शुक्रिया

प्रधानमंत्री ने सेना, पुलिस, डॉक्टरों, सफाई कर्मचारियों और लोकल प्रशासन का दिल से धन्यवाद किया, जो दिन-रात काम करके इस यात्रा को सुरक्षित और आसान बनाते हैं। उन्होंने यात्रियों से अपील की कि वे यात्रा के दौरान इन 5 संकल्पों को जरूर याद रखें:-

रास्ते में गंदगी न फैलाएं और प्रकृति की खूबसूरती को बचाकर रखें।

सुरक्षा नियमों और ट्रैफिक गाइडलाइंस का पूरा पालन करें।

जम्मू-कश्मीर के लोकल दुकानदारों से सामान खरीदें ताकि वहां के लोगों की कमाई हो सके।

यात्रा से वापस घर लौटने पर अपने परिवार या किसी करीबी के नाम पर एक पौधा जरूर लगाएं।

पूरी यात्रा में आपस में प्यार, एकता और भाईचारे की भावना बनाए रखें।

'हर हर महादेव' के साथ बाबा बर्फानी का स्वागत

पीएम मोदी ने जो तस्वीरें शेयर की हैं, उनमें से एक पर 'अमरनाथ यात्रा: भक्तों के लिए प्रधानमंत्री का संदेश' लिखा है और साथ में अमरनाथ गुफा के पवित्र बर्फानी शिवलिंग की तस्वीर भी है। इस मैसेज की शुरुआत हर हर महादेव और जय बाबा बर्फानी के जयकारों के साथ की गई है, जिसमें सभी की यात्रा के सफल होने की कामना की गई है।

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भारी सुरक्षा के बीच यात्रा की शुरुआत

जम्मू-कश्मीर में अमरनाथ यात्रा आज से पूरी सुरक्षा के बीच शुरू हो गई है। यात्रियों का पहला ग्रुप जम्मू से रवाना हो चुका है। सरकार और प्रशासन ने सुरक्षा के बहुत कड़े इंतजाम किए हैं ताकि किसी को कोई परेशानी न हो। 57 दिनों तक चलने वाली यह यात्रा इस साल 28 अगस्त तक चलेगी।

दो रास्तों से पूरी होगी यात्रा

यह पवित्र गुफा हिमालय में 12,000 फीट से भी ज्यादा की ऊंचाई पर है, जहां बर्फ से प्राकृतिक शिवलिंग बनता है। लोग इसे भगवान शिव का रूप मानकर पूजते हैं। यात्री यहां पहुंचने के लिए दो रास्तों का इस्तेमाल कर सकते हैं, पहला पारंपरिक पहलगाम रास्ता है और दूसरा थोड़ा छोटा लेकिन सीधी चढ़ाई वाला बालटाल रास्ता है। हर साल इस यात्रा में देश के कोने-कोने से लाखों भक्त आते हैं।

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