By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 10, 2026
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय कानून पर आधारित सुरक्षित और सतत अंतरिक्ष क्षेत्र का समर्थन करता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वैज्ञानिक आंकड़ों का उपयोग ईमानदारी के साथ एक साझा लक्ष्य की पूर्ति के लिए होना चाहिए। पेरिस में आयोजित अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष शिखर सम्मेलन को ऑनलाइन माध्यम से संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की प्रौद्योगिकी और साझेदारियां न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के लिए उपयोगी हैं।
वैज्ञानिक आंकड़ों का उपयोग ईमानदारी के साथ एक साझा लक्ष्य की पूर्ति के लिए होना चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि भारत की अंतरिक्ष यात्रा इसी सोच को दर्शाती है और इस यात्रा के केंद्र में मौजूद इसरो ने अपनी उत्कृष्टता और कम लागत वाले अभियानों के लिए दुनियाभर में प्रशंसा हासिल की है। उन्होंने कहा कि इसरो के अभियान किसानों और मछुआरों, मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन और नेविगेशन के क्षेत्र में उपयोगी साबित हो रहे हैं। मोदी ने कहा, ‘‘चौतीस देशों के 430 से अधिक उपग्रह भारतीय रॉकेट के जरिये अंतरिक्ष भेजे जा चुके हैं।
इसरो की प्रौद्योगिकियां और साझेदारियां न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया की सेवा कर रही हैं।’’ मोदी ने कहा, ‘‘दुनिया के इस भरोसे के पीछे भारतीय वैज्ञानिकों, इंजीनियर और तकनीशियन की कई पीढ़ियों की लगन और कड़ी मेहनत है। दिन-रात काम करते हुए उन्होंने इसरो की प्रतिष्ठा स्थापित की है।’’ उन्होंने कहा कि ‘चंद्रयान-3’ ने भारत को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरने वाला पहला देश बना दिया और ‘आदित्य-एल1’ सूर्य के रहस्यों को उजागर कर रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले साल एक भारतीय अंतरिक्ष यात्री ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) का दौरा किया।
मोदी ने कहा, ‘‘आगे बढ़ते हुए हमारा लक्ष्य 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करना और 2040 तक किसी भारतीय को चंद्रमा पर भेजना है। इन सभी प्रयासों में हमारा मार्गदर्शक सिद्धांत स्पष्ट रहा है - इनके लाभ पूरी मानवता तक पहुंचने चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि इसरो के साथ-साथ भारत का निजी अंतरिक्ष क्षेत्र भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘...1960 के दशक में थुंबा से भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की शुरुआत के बाद से फ्रांस एक भरोसेमंद साझेदार रहा है।
आज हमारा सहयोग पृथ्वी अवलोकन और उन्नत प्रौद्योगिकियों तक फैला हुआ है, जो वैज्ञानिक उत्कृष्टता को मानवीय उद्देश्यों के साथ जोड़ता है। हम फ्रांस और दुनिया को भारत के अगले चरण के अंतरिक्ष अनुसंधान में सहयात्री बनने के लिए आमंत्रित करते हैं।’’ प्रधानमंत्री ने शिखर सम्मेलन में आमंत्रित करने के लिए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का धन्यवाद किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का दृष्टिकोण ‘वसुधैव कुटुंबकम’ यानी ‘एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य’ की भावना पर आधारित है और यही भावना पृथ्वी से आगे अंतरिक्ष तक भी पहुंचनी चाहिए।