By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 26, 2026
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि अब युद्ध केवल पारंपरिक तरीकों से नहीं लड़े जाते, बल्कि अर्थव्यवस्थाओं को निशाना बनाकर भी लड़े जाते हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की बैंकिंग प्रणाली को ‘‘साइबर आतंकवादियों’’ से सुरक्षित रखने की जरूरत पर जोर दिया। यहां भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 169 करोड़ रुपये की लागत से बने डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन करने के बाद एक सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि इन सुविधाओं से ओडिशा और देश के लोगों को काफी लाभ होगा।
मोदी ने कहा कि इन चुनौतियों से निपटने के लिए देश को आधुनिक बुनियादी ढांचे और कुशल मानव संसाधन की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ऐसे में आरबीआई के डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान जैसी संस्थाओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है। इन नयी सुविधाओं को भारत की नयी प्राथमिकताओं का प्रतीक बताते हुए मोदी ने कहा कि पूर्वी भारत ‘विकसित भारत’ के शक्तिशाली विकास इंजन के रूप में उभर रहा है।
मोदी ने विपक्षी कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला और आरोप लगाया कि उसके शासनकाल में आम लोगों को बैंकिंग सेवाओं से वंचित रखा गया। उन्होंने कहा कि गरीबों के नाम पर 1960 और 1970 के दशक में बैंकों का राष्ट्रीयकरण किया गया था, लेकिन 2014 में पता चला कि देश की आधी से अधिक आबादी बैंकिंग व्यवस्था से बाहर थी। उन्होंने कहा कि उस समय मध्यम वर्ग के लिए भी बैंक से कर्ज लेना सपना था, जबकि गरीबों, छोटे किसानों और महिलाओं के लिए तो इसकी कल्पना करना भी मुश्किल था।
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘हालांकि, कांग्रेस के शासनकाल में अमीर और प्रभावशाली लोगों को फोन पर ही हजारों करोड़ रुपये का कर्ज मिल जाता था। इस कुप्रबंधन के कारण भारतीय बैंकिंग प्रणाली गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) की समस्या के प्रति संवेदनशील हो गई थी। बैंकिंग प्रणाली ढहने की कगार पर थी।’’ उन्होंने कहा कि 2014 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सत्ता में आने के बाद स्थिति बदल गई।
अब भारत का बैंकिंग क्षेत्र दुनिया के सबसे कुशल क्षेत्रों में शामिल है और लोगों को चौबीसों घंटे बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध हैं। मोदी ने कहा कि छोटे उद्यमियों, पारंपरिक कारीगरों, रेहड़ी-पटरी वालों और असंगठित क्षेत्र के कामगारों को पहली बार औपचारिक बैंकिंग सेवाओं का लाभ मिला है। उन्होंने कहा, ‘‘एक पूर्व प्रधानमंत्री ने ओडिशा की धरती से कहा था कि दिल्ली से भेजे गए हर रुपये में से केवल 15 पैसे ही लोगों तक पहुंचते हैं।
आज पूरी राशि लाभार्थियों के बैंक खातों में पहुंचती है। करीब 60 करोड़ जनधन खाते खोले जा चुके हैं।’’ उन्होंने कहा कि पहले डेबिट और क्रेडिट कार्ड आम लोगों के लिए विलासिता की वस्तुएं थे, लेकिन अब ये सभी के लिए उपलब्ध हैं। मोदी ने कहा, ‘‘हमारे लिए विकास का अर्थ भारत का संतुलित विकास और गांवों तथा छोटे शहरों के लिए अवसर उपलब्ध कराना है।’’ उन्होंने कहा कि पिछला दशक उन लोगों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने के लिए समर्पित था, जो इनसे वंचित थे।
आने वाला दशक बैंकिंग सेवाओं को अधिक कुशल और भरोसेमंद बनाने पर केंद्रित होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि ओडिशा खनन से लेकर माइक्रोचिप तक के क्षेत्रों में अपना भविष्य गढ़ेगा और युवाओं के लिए अवसरों के कई द्वार खुलेंगे। इस कार्यक्रम में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा, ओडिशा के राज्यपाल ब्रजमोहन राम, मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी मौजूद थे।
आरबीआई का डेटा सेंटर 18.55 एकड़ में फैला है। इसकी आधारशिला तत्कालीन आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने 22 मार्च, 2023 को रखी थी। सरकार ने बयान में कहा कि डेटा सेंटर में भुगतान और निपटान से जुड़ी महत्वपूर्ण प्रणालियों के साथ आरबीआई की अन्य प्रमुख पहल भी संचालित होंगी।
इस मौके पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्तीय स्थिरता और निरंतर आर्थिक वृद्धि का समर्थन करने में लचीले बुनियादी ढांचे के रणनीतिक महत्व का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि नया डेटा सेंटर आरटीजीएस और एनईएफटी सहित आरबीआई की महत्वपूर्ण प्रणालियों को संभालेगा, जबकि प्रशिक्षण संस्थान साइबर सुरक्षा, एआई और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों में विशेषज्ञता का निर्माण करेगा। रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने उभरती प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाने, डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने, साइबर सुरक्षा को बढ़ाने, स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं को विकसित करने और 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने का समर्थन करने के लिए केंद्रीय बैंक की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।