Malaysia Visit के दौरान PM Modi चलने वाले हैं बड़ा कूटनीतिक दाँव, दक्षिण पूर्व एशिया में भारत देगा मजबूत दस्तक

By नीरज कुमार दुबे | Feb 04, 2026

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 7 और 8 फरवरी को मलेशिया की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम के निमंत्रण पर हो रही यह यात्रा कई मायनों में विशेष है। हम आपको बता दें कि प्रधानमंत्री की मलेशिया की यह तीसरी यात्रा होगी और अगस्त 2024 में भारत और मलेशिया के संबंधों को व्यापक सामरिक साझेदारी के स्तर पर ले जाने के बाद यह पहली यात्रा है। ऐसे समय में जब विश्व राजनीति में संतुलन बदल रहा है, तब यह यात्रा भारत की सक्रिय और आत्मविश्वासी विदेश नीति का स्पष्ट संकेत है।


हम आपको बता दें कि कुआलालंपुर में दोनों प्रधानमंत्रियों के बीच विस्तृत वार्ता होगी जिसमें व्यापार, निवेश, रक्षा, सुरक्षा, समुद्री सहयोग, डिजिटल तथा वित्तीय प्रौद्योगिकी, ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा, संस्कृति, पर्यटन और जन से जन संपर्क जैसे अनेक विषय शामिल रहेंगे। साथ ही भारत मलेशिया मुख्य कार्यकारी अधिकारी मंच का दसवां सम्मेलन भी इसी समय आयोजित होगा, जो आर्थिक सहयोग को नई दिशा दे सकता है। देखा जाये तो भारत और मलेशिया के संबंध इतिहास, सभ्यता और संस्कृति की गहरी जड़ों से जुड़े हैं। मलेशिया में लगभग 29 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जो विश्व में भारतीय प्रवासी समाज की सबसे विशाल आबादियों में से एक है। यही समाज दोनों देशों के बीच सेतु का काम करता है। प्रधानमंत्री मोदी इस प्रवासी समाज को भी संबोधित करेंगे। कुआलालंपुर के एक विशाल सभागार में लगभग 15 हजार भारतीय मूल के लोग उनके स्वागत को एकत्र होंगे। 60 से अधिक सामुदायिक संस्थाएं मिलकर मोदी के स्वागत कार्यक्रम का आयोजन कर रही हैं। यह आयोजन भारतीय विविधता और मलेशियाई समाज के साथ उसके मेल का जीवंत प्रदर्शन होगा।

इसे भी पढ़ें: जनरल नरवणे की किताब लेकर Rahul Gandhi का तंज, 'PM Modi में Lok Sabha आने की हिम्मत नहीं'

हम आपको यह भी बता दें कि यह समय मलेशिया के भीतर भी सांस्कृतिक उत्सवों का है। थाइपुसम पर्व, चीनी नव वर्ष और नाग नृत्य जैसे आयोजन माहौल को उत्सवमय बनाते हैं। ऐसे अवसर पर मोदी की उपस्थिति भारत की सौम्य शक्ति को उजागर करेगी और यह संदेश देगी कि भारत विविधता को साथ लेकर चलने वाला समाज है। हम आपको याद दिला दें कि पिछले वर्ष अक्टूबर में मलेशिया में आयोजित आसियान शिखर बैठक में घरेलू कारणों से प्रधानमंत्री स्वयं नहीं जा सके थे और विदेश मंत्री जयशंकर ने भारत का प्रतिनिधित्व किया था। अब यह यात्रा उस कमी को भी पूरा करेगी। विदेश मंत्री जयशंकर और मलेशिया के विदेश मंत्री के बीच पहले ही द्विपक्षीय सहयोग और म्यांमार की स्थिति जैसे विषयों पर चर्चा हो चुकी है।


हम आपको बता दें कि मलेशिया आसियान क्षेत्र में भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। भारत की लुक ईस्ट पॉलिसी में दक्षिण पूर्व एशिया का विशेष स्थान है। ऐसे में यह यात्रा रणनीतिक भी है। भारत इस वर्ष ब्रिक्स समूह की अध्यक्षता कर रहा है और आगे शिखर बैठक की मेजबानी करेगा, इसलिए दक्षिण पूर्व एशिया में सक्रियता और भी अहम हो जाती है। प्रधानमंत्री मोदी ने हाल की आसियान भारत शिखर वार्ता में वर्चुअल रूप से कहा भी था कि 21वीं शताब्दी भारत और आसियान की शताब्दी है। उन्होंने आसियान एकता, आसियान केंद्रीय भूमिका और हिंद प्रशांत दृष्टि के प्रति भारत की निष्ठा दोहराई थी। मुक्त व्यापार समझौते की समीक्षा को गति देने, दो अरब से अधिक लोगों को लाभ पहुंचाने, क्षेत्रीय स्थायित्व मजबूत करने, आतंकवाद के विरुद्ध सामूहिक कदम उठाने और 2026 से 2030 की कार्य योजना को सहयोग देने का भी उन्होंने आश्वासन दिया था। तिमोर लेस्ते को आसियान का नया सदस्य बनने पर बधाई देकर भारत ने क्षेत्रीय समावेशन के प्रति अपना समर्थन भी दिखाया था।


इसके अलावा, एक और चीज देखने में आ रही है कि हाल के समय में अनेक इस्लामी देशों के शासकों की भारत यात्राएं हुई हैं, खाड़ी क्षेत्र के विदेश मंत्री भी पिछले सप्ताह भारत आए थे और अब मोदी का मलेशिया जाना इस बात का संकेत है कि भारत का संवाद केवल पश्चिम तक सीमित नहीं है। वह पश्चिम एशिया से लेकर दक्षिण पूर्व एशिया तक संतुलित और सम्मानजनक संबंध बना रहा है।


देखा जाये तो मुस्लिम समाज वाले देशों के साथ भारत के संबंधों में हाल के वर्षो में जो सहजता आई है, वह अपने आप नहीं आई। इसके पीछे निरंतर संवाद, सम्मान और साझा हितों की समझ है। खाड़ी देशों से लेकर दक्षिण पूर्व एशिया तक भारत ने यह दिखाया है कि वह धर्म नहीं, हित और सहयोग की भाषा बोलता है। मलेशिया यात्रा उसी श्रृंखला की कड़ी है। वैसे भी मलेशिया का महत्व केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। वह समुद्री मार्गों, हिंद प्रशांत क्षेत्र और आसियान राजनीति में अहम स्थान रखता है। वहां भारतीय मूल का विशाल समाज भारत की छवि का जीवंत दूत है। जब भारत का प्रधानमंत्री वहां पहुंचता है तो वह केवल द्विपक्षीय करार नहीं करता, वह मन भी जीतता है।


मलेशिया यात्रा का संदेश यह भी है कि भारत मित्रता चाहता है, पर अपने हितों के साथ। वह साझेदारी चाहता है, पर समान सम्मान के साथ। और सबसे अहम, वह विश्व को बता रहा है कि नई दिल्ली अब विश्व मंच पर सक्रिय नायक है। यही इस यात्रा का असली सामरिक अर्थ है।

All the updates here:

प्रमुख खबरें

Hit and Run राजनीति खत्म, CM Himanta का पलटवार, Gaurav Gogoi पर करेंगे मानहानि का केस

Azerbaijan से भारत के रिश्ते होंगे और मजबूत, Abhay Kumar ने संभाला Ambassador का चार्ज

संसद में बवाल: Nishikant Dubey की मांग- 2014 से पहले की किताबों पर हो चर्चा, खुलेगी Congress की पोल

हवा में धधका Turkish Airlines का इंजन, 236 यात्रियों की अटकी सांसें, Kolkata में हुई Emergency Landing