Indira Gandhi's Emergency |आपातकाल पर प्रधानमंत्री मोदी बोले- कोई भारतीय नहीं भूलेगा कि कैसे संविधान की भावना का उल्लंघन किया गया

By रेनू तिवारी | Jun 25, 2025

25 जून 1975 की आधी रात को, भारत - एक युवा लोकतंत्र और दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र - जम गया। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने देशव्यापी आपातकाल की घोषणा की थी। नागरिक स्वतंत्रता को निलंबित कर दिया गया, विपक्षी नेताओं को जेल में डाल दिया गया, प्रेस पर रोक लगा दी गई और संविधान को पूर्ण कार्यकारी शक्ति के साधन में बदल दिया गया। अगले 21 महीनों तक, भारत तकनीकी रूप से अभी भी एक लोकतंत्र था, लेकिन कुछ भी नहीं की तरह काम कर रहा था। आज 25 जून 2025 को आपातकाल के वो काले दिन को लगे 50 साल हो गये है।

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उन्होंने कहा कि आपातकाल में संविधान में निहित मूल्यों को दरकिनार कर दिया गया, मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया, प्रेस की स्वतंत्रता को दबा दिया गया और बड़ी संख्या में राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्रों और आम नागरिकों को जेल में डाल दिया गया। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ऐसा लग रहा था जैसे उस समय सत्ता में बैठी कांग्रेस सरकार ने लोकतंत्र को बंधक बना लिया था।’’ मोदी सरकार ने पिछले साल घोषणा की थी कि आपातकाल की बरसी को ‘‘संविधान हत्या दिवस’’ ​​के रूप में मनाया जाएगा।

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उन्होंने कहा कि 42वें संशोधन में संविधान में व्यापक परिवर्तन किए गए जो आपातकाल लगाने वाली कांग्रेस सरकार की चालों का एक प्रमुख उदाहरण है, जिसे जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार ने बाद में पलट दिया था। उन्होंने कहा कि गरीबों, हाशिए पर पड़े लोगों और दलितों को विशेष रूप से निशाना बनाया गया और उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाई गई। मोदी ने कहा, ‘‘हम अपने संविधान में निहित सिद्धांतों को मजबूत करने और विकसित भारत के अपने दृष्टिकोण को साकार करने के लिए मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता भी दोहराते हैं। हम प्रगति की नयी ऊंचाइयों को छूएं और गरीबों तथा दलितों के सपनों को पूरा करें।’’

आपातकाल के खिलाफ लड़ाई में डटे रहने वाले हर व्यक्ति को सलाम करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ये लोग पूरे भारत से, हर क्षेत्र से, हर विचारधारा से थे, जिन्होंने एक ही उद्देश्य से एक-दूसरे के साथ मिलकर काम किया और वह था: भारत के लोकतांत्रिक ढांचे की रक्षा करना और उन आदर्शों को बनाए रखना जिनके लिए स्वतंत्रता सेनानियों ने अपना जीवन समर्पित कर दिया। उन्होंने कहा, ‘‘यह उनका सामूहिक संघर्ष था जिसने यह सुनिश्चित किया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार लोकतंत्र बहाल करे। नए सिरे से चुनाव कराने पड़े, जिसमें वे (कांग्रेस पार्टी) बुरी तरह हार गए।

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