By नीरज कुमार दुबे | Aug 20, 2026
सोशल मीडिया की दुनिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद सबसे ऊपर हैं, लेकिन उनके मंत्रिमंडल में भी कुछ चेहरे ऐसे हैं जिनकी डिजिटल मौजूदगी ने प्रधानमंत्री का ध्यान खींचा है। अमित शाह, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, शिवराज सिंह चौहान, पीयूष गोयल, अश्विनी वैष्णव और सीआर पाटिल सोशल मीडिया प्रदर्शन में शीर्ष नेताओं में शामिल रहे। इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, कांग्रेस नेता राहुल गांधी, आम आदमी पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सोशल मीडिया पकड़ का भी उदाहरण मोदी सरकार के मंत्रियों के सामने रखा गया है।
बैठक में प्रधानमंत्री ने मंत्रियों को दो अहम निर्देश दिए। पहला, “वन डे, वन यूनिवर्सिटी” के तहत मंत्रियों को विश्वविद्यालयों में जाकर छात्रों के साथ एक दिन बिताने और सीधा संवाद करने को कहा गया। दूसरा, उन्हें अपने संसदीय क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों का दौरा कर बच्चों को मिलने वाली सुविधाओं, शिक्षकों की उपलब्धता और मिड-डे मील की गुणवत्ता का जायजा लेने का निर्देश दिया गया। प्रधानमंत्री का यह नया फोकस सीधे Gen Z और Gen Alpha पर है। खासकर 5 से 15 वर्ष की उम्र के बच्चों तक पहुंच बनाने और सरकारी स्कूलों की जमीनी हकीकत जानने पर जोर दिया गया है।
यह पहल ऐसे समय में सामने आई है, जब छात्र आंदोलनों के बाद युवाओं तक पहुंच को लेकर सरकार की सक्रियता बढ़ी है। वहीं, सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं, शिक्षकों और बच्चों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, मंत्रियों से यह भी कहा गया है कि वे अपने स्थानीय प्रतिनिधियों को नियमित रूप से सरकारी स्कूलों में भेजकर वहां की व्यवस्था की निगरानी कराएं।
बैठक में केवल भाजपा और केंद्रीय मंत्रियों की डिजिटल सक्रियता ही नहीं, बल्कि अन्य राजनीतिक दलों के प्रमुख नेताओं के सोशल मीडिया प्रदर्शन का भी हवाला दिया गया। मकसद साफ था कि मंत्री यह समझें कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर केवल मौजूद रहना काफी नहीं, बल्कि जनता के साथ लगातार और प्रभावी संवाद ही राजनीतिक पहुंच को मजबूत करता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने मंत्रियों से युवाओं के लिए AI स्किल ट्रेनिंग के अवसरों का भी आकलन करने को कहा है। यह स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर किए गए ऐलानों की दिशा में अगला कदम माना जा रहा है। साथ ही मंत्रियों को प्रधानमंत्री की ओर से बताए गए “सप्तधारा” के क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित करने के निर्देश दिए गए हैं। स्पष्ट है कि सरकार का नया मंत्र अब सिर्फ “पोस्ट करो” नहीं, बल्कि “कनेक्ट करो” है। सोशल मीडिया से लेकर विश्वविद्यालयों और सरकारी स्कूलों तक, मोदी सरकार अब नई पीढ़ी के बीच सीधी पहुंच और जमीनी फीडबैक की नई रणनीति पर काम करती दिख रही है।