By अंकित सिंह | Oct 23, 2026
23 अक्टूबर को नई दिल्ली में 'चिन्मय अमृत महोत्सव ग्लोबल सम्मेलन' में अपने संबोधन के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि व्यक्तिगत उन्नति को राष्ट्रीय प्रगति का माध्यम बनना चाहिए। उन्होंने स्वामी चिन्मयानंद की शिक्षाओं का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे इस आध्यात्मिक गुरु ने आध्यात्मिक विकास को राष्ट्र के विकास से जोड़ने का प्रयास किया। भारत मंडपम में आयोजित तीन दिवसीय कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने एक वैदिक मंत्र, "वयं राष्ट्र जागृयाम पुरोहिताः" का उल्लेख किया। यह मंत्र नागरिकों का आह्वान करता है कि वे राष्ट्र को जागरूक और उन्नत बनाने की दिशा में काम करें। उन्होंने कहा कि राष्ट्र का भला चाहने वाले लोगों के रूप में, हमारा कर्तव्य है कि हम राष्ट्र को जागरूक और उन्नत बनाएं। स्वामी चिन्मयानंद जी ने अपना पूरा जीवन इसी मंत्र से प्रेरित होकर जिया।
चिन्मय मिशन के बारे में बात करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने इसे केवल एक संस्था से कहीं बढ़कर बताया। उन्होंने इसे एक आध्यात्मिक संत की दूरदृष्टि से उपजा चिन्मय विचार कहा। उन्होंने कहा कि आप सभी की शुभकामनाओं से, आज मुझे चिन्मय मिशन के अमृत महोत्सव का हिस्सा बनने का अवसर मिला है। यह एक बिल्कुल अलग तरह का आध्यात्मिक अनुभव है। यह मेरे प्रति हमारे संतों का विशेष स्नेह और आशीर्वाद है।
उन्होंने आगे कहा कि चूंकि चिन्मय मिशन केवल एक संस्था नहीं है, बल्कि यह एक ‘चिन्मय विचार’ है, जिसकी नींव एक ‘चिन्मय ऋषि’ ने रखी थी। दशकों की इसकी यात्रा भी ‘चिन्मय संकल्पों’ से भरी रही है। और जो कुछ भी ‘चिन्मय’ है, वह स्वाभाविक रूप से अमर है, वह अमृतमय है। उन्होंने कहा कि 2047 में भारत जब अपनी आजादी के 100 साल पूरे करेगा, उसी कालखंड में चिन्मय मिशन भी अपनी शताब्दी का वर्ष मनाएगा यानी चिन्मय मिशन की शताब्दी यात्रा और विकसित भारत की यात्रा एक साथ आगे बढ़ेगी। इसलिए हमारे लक्ष्य भी एक हैं, उद्देश्य भी एक है और हमें इस यात्रा को एकसाथ आगे बढ़ाना है।
मोदी ने कहा कि बीते दशकों में समय बदला है, देश के सामने नई चुनौतियों पैदा हुई हैं, समाज में नई विकृतियां आई हैं। आज उनके समाधान का दायित्व हम सबके ऊपर है। आज हमें बांटने वाली ताकतों के खिलाफ समाज को एकजुट करना है। हमें आत्मनिर्भरता के लिए देशवासियों को जागरूक करना है। 2047 में विकसित भारत के संकल्प से जन-जन को जोड़ना है। इन उद्देश्यों के लिए हमें और सक्रिय होना है। चिन्मय मिशन के प्रयास से आज लाखों युवा हैं... जो भारत के सांस्कृतिक ब्रांड एंबेसडर का काम कर रहे हैं। ये भारतीय युवा पत्रिका को नई पीढ़ी तक पहुंचा रहे हैं।