PM Narendra Modi ने जल संरक्षण के लिए AI और आधुनिक तकनीक अपनाने पर दिया जोर

By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Sep 03, 2026

नयी दिल्ली, दो सितंबर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को शहरीकरण से पैदा होने वाली उन चुनौतियों के प्रति शहरी स्थानीय निकायों को संवेदनशील बनाने का आह्वान किया, जिनमें बढ़ती आबादी और भविष्य में पानी की जरूरतें शामिल हैं। मोदी ने जल शक्ति मंत्रालय के दो दिवसीय राष्ट्रीय विभागीय जल शिखर सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए पानी बचाने वाली तकनीकों को अधिक से अधिक अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने वैश्विक स्तर पर अपनाई जा रही बेहतर कार्यप्रणालियों की जानकारी देने के लिए विशेष प्रदर्शनियों और कार्यशालाओं के आयोजन का सुझाव दिया, ताकि भारतीय निर्माता और संबंधित पक्ष जल संरक्षण के प्रभावी समाधान विकसित करने और उन्हें बड़े स्तर पर लागू करने में सक्षम हो सकें।

बांधों की सुरक्षा के संबंध में प्रधानमंत्री ने प्रत्येक मानसून से पहले व्यापक तैयारियां करने, निर्धारित सावधानियों का पालन करने और स्कूली छात्रों में जागरूकता पैदा करने पर जोर दिया। उन्होंने इसके लिए पाठ्यक्रम में उपयुक्त सामग्री शामिल करने का भी सुझाव दिया। प्रधानमंत्री ने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में जल प्रबंधन से जुड़ी जानकारी तथा क्षमता को मजबूत करने का भी आह्वान किया।

मोदी ने दो दिवसीय सम्मेलन में हुई गहन चर्चा की सराहना की और कहा कि इससे सामने आए व्यावहारिक एवं समयबद्ध कार्य बिंदुओं पर लगातार समीक्षा और सीखने की प्रक्रिया के जरिए काम किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन केवल एक बार होने वाली कवायद बनकर नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसकी लगातार समीक्षा और आगे की कार्रवाई की जानी चाहिए। प्रधानमंत्री ने जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और किसानों को शामिल करते हुए राज्यों के बीच योजनाबद्ध अध्ययन दौरों का सुझाव दिया, ताकि व्यावहारिक सीख हासिल की जा सके और उन्हें अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जा सके।

उन्होंने जल संबंधी आंकड़ों के बेहतर प्रबंधन की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि जल क्षेत्र से जुड़े आंकड़ों को एक जगह लाकर व्यवस्थित तरीके से प्रबंधित, विश्लेषित और प्रभावी ढंग से इस्तेमाल किया जाना चाहिए। मोदी ने एक समान प्रारूप के जरिए आंकड़े जुटाने और उनके विश्लेषण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के इस्तेमाल की वकालत की। उन्होंने जल संकट से निपटने के लिए पहले से तैयारी करते हुए एकीकृत योजना बनाने पर जोर दिया।

इसके तहत उपचारित पानी का कृषि और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए उचित इस्तेमाल किया जा सकता है। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि व्यवस्थित योजना, प्रतिबद्धता, पर्याप्त संसाधनों और सक्षम अधिकारियों की तैनाती के जरिए पानी की कमी की स्थितियों को अवसरों में बदला जा सकता है। बाद में सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘जल सुरक्षा भारत और हमारे ग्रह के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

इसके लिए नए विचारों, प्रौद्योगिकी और सबसे बढ़कर जन भागीदारी की जरूरत है।

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