By नीरज कुमार दुबे | Feb 28, 2026
तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश सरकार ने एक सप्ताह के भीतर सेना में दूसरी बार व्यापक फेरबदल करते हुए स्पष्ट संकेत दिया है कि सत्ता और सुरक्षा ढांचे में किसी भी तरह के बाहरी प्रभाव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हम आपको बता दें कि पूर्व की अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस के कार्यकाल में पाकिस्तान समर्थक अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्त किया गया था, जबकि नये प्रधानमंत्री अब चुन चुन कर ऐसे अधिकारियों को पदों से हटाकर बाहर का रास्ता दिखा रहे हैं। बताया जा रहा है कि हालिया तबादलों में वह उच्च स्तरीय अधिकारी भी शामिल हैं जिनकी भूमिका को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे थे।
सूत्रों का कहना है कि इस कदम से सेना प्रमुख वेकर उज जमान की स्थिति और मजबूत हुई है। यह फेरबदल केवल सेना तक सीमित नहीं है, बल्कि तारिक नेतृत्व वाली सरकार प्रशासनिक ढांचे में भी व्यापक बदलाव कर रही है। अंतरिम सरकार के दौरान संविदा पर नियुक्त कई अधिकारियों की सेवाएं समाप्त की जा रही हैं। इसे सत्ता संरचना में स्थायित्व लाने और पुराने प्रभाव तंत्र को समाप्त करने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
सूत्रों ने दावा किया कि इस कार्रवाई से सेना के भीतर पुराने जमात समर्थक और पाकिस्तान समर्थक उच्च स्तरीय अधिकारियों की श्रृंखला टूट गई है। अन्य सेवाओं में भी विपक्षी जमात-ए-इस्लामी से निकटता रखने वाले कई अधिकारियों को हटाया गया है। इनमें अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण के मुख्य अभियोजक ताजुल इस्लाम का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है।
सेना प्रमुख वेकर उज जमान को हालिया आम चुनावों के संचालन में सशस्त्र बलों के व्यापक समर्थन का श्रेय दिया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना 2024 में अपनी सरकार के खिलाफ हुए हिंसक प्रदर्शनों के बीच सैन्य हेलिकॉप्टर से भारत चली गई थीं। वेकर उज जमान को उनका रिश्तेदार भी बताया जाता है। इस राजनीतिक पृष्ठभूमि के चलते सेना के भीतर शक्ति संतुलन का प्रश्न और भी महत्वपूर्ण हो गया है।
जहां तक बांग्लादेश में हुए फेरबदल की बात है तो आपको बता दें कि 26 फरवरी को रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्मद शाहीनुल हक, जो राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय के कमांडेंट थे, उनको क्वार्टरमास्टर जनरल नियुक्त किया गया है। वहीं मेजर जनरल हुसैन अल मोर्शेद, जो 19वीं इन्फैंट्री डिवीजन और घाताइल क्षेत्र के जनरल आफिसर कमांडिंग थे, उनको सेना मुख्यालय में नया एडजुटेंट जनरल बनाया गया है। उन्होंने मेजर जनरल एमडी हकीमुज्जमान का स्थान लिया है, जिन्हें अब सैन्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान का कमांडेंट बनाया गया है।
इससे पहले 22 फरवरी को हुए फेरबदल में चीफ आफ जनरल स्टाफ, प्रिंसिपल स्टाफ आफिसर और डायरेक्टरेट जनरल ऑफ फोर्सेस इंटेलिजेंस के प्रमुखों को बदला गया था। इससे पूर्व प्रधानमंत्री कार्यालय के सचिव सहित 13 अधिकारियों को उनके पदों से हटाया गया था। इनमें से आठ अधिकारी अंतरिम सरकार द्वारा संविदा के आधार पर नियुक्त किए गए थे।
देखा जाये तो बांग्लादेश की सैन्य पुनर्संरचना के गहरे सामरिक निहितार्थ हैं। किसी भी देश की सुरक्षा नीति में सेना प्रमुख की निर्णायक भूमिका होती है। यदि शीर्ष स्तर पर मतभेद या वैचारिक विभाजन हो तो राष्ट्रीय सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। इस फेरबदल से नेतृत्व के प्रति निष्ठा सुनिश्चित करने की कोशिश समझी जा रही है। साथ ही बांग्लादेश की भौगोलिक स्थिति उसे दक्षिण एशिया में सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है। भारत, म्यांमार और बंगाल की खाड़ी से घिरा यह देश क्षेत्रीय संतुलन में अहम भूमिका निभाता है। सेना के भीतर पाकिस्तान समर्थक प्रभाव को समाप्त करने का प्रयास क्षेत्रीय कूटनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है, विशेषकर भारत बांग्लादेश संबंधों के संदर्भ में।
बहरहाल, विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह फेरबदल बांग्लादेश की आंतरिक राजनीति, नागरिक सैन्य संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य को नई दिशा दे सकता है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि ढाका में सत्ता के केंद्र में बैठी सरकार सेना के भीतर अपने विश्वासपात्र नेतृत्व को स्थापित कर स्थायित्व और नियंत्रण सुनिश्चित करना चाहती है।