सशक्तीकरण- धूमिल अस्तित्व का (कविता)

By निर्देश त्यागी | Mar 08, 2026

आज फिर से आ गया है आठ मार्च -अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस बस एक दिन के लिए अपनी पहचान दर्ज कराने।

कल ये चला जाएगा और 364 दिन लंबी नींद सो जाएगा ।

आज के खास दिन महिला सशक्तीकरण पर बड़ी - बड़ी सभाओं का आयोजन किया जाएगा ।

नारी के उत्थान, विकास, सम्मान, अधिकार, आजादी और समानता दिलाने पर बल दिया जाएगा।

बातें होंगी सबको साथ लेकर चलने की।

जादुई छड़ी से अचानक सब कुछ बदलने की।

कोई नहीं पढ़ पाएगा इन सब से अनभिज्ञ सुदूर क्षेत्रों में बसी  नारी का अंतर्मन।

जो नहीं जानती आज उसी के नाम पर मनाया जा रहा है जश्न। उसे सिखाया गया है मौन रहकर सब कुछ सहना।

घुटन,दर्द ,आंसुओं के साथ किस्मत के भरोसे रहना ।

उनकी बेड़ियों को कौन तोड़ेगा, किसका कर रहे हैं हम इंतजार?

जाना होगा उनके दिलों तक कराना होगा उनसे उनकी काबिलियत का साक्षात्कार ।

आसमान से नीचे उतर धरातल पर उन्हें साथ लेकर चलना है।

सदियों से चली आ रही 

सड़ी- गली सोच को बदलना है

देना हैं हौंसला, भरना है मनो में उनके विश्वास।

आधी आबादी का ये धूमिल अस्तित्व समाज  निर्माण के लिए है बहुत खास ।

ये शुभ दिन ये त्यौहार।

जो दिनों से बढ़कर महीनों ,सालों और युगों तक जाएगा ।

कैलेंडर की हर तारीख पर अपनी पहचान दर्ज कराएगा।

तभी सही मायनों में महिला सशक्तीकरण हो पाएगा । 

तभी सही मायनों में महिला सशक्तीकरण हो पाएगा।

- निर्देश त्यागी

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