By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Aug 03, 2026
(एम. जुल्करनैन) लाहौर, दो अगस्त पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में धांधली और हिंसा के आरोपों के बीच रविवार को तथाकथित विधानसभा चुनावों का दूसरा चरण संपन्न हुआ। भारत का मानना है कि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत के अभिन्न एवं अविभाज्य अंग हैं, जिनमें वे क्षेत्र भी शामिल हैं जिन पर “पाकिस्तान का अवैध तथा जबरन कब्जा” है। भारत ने 28 जुलाई को इन चुनावों को अवैध कब्जे और क्षेत्र में गंभीर मानवाधिकार उल्लंघनों को छिपाने की पाकिस्तान की कोशिश बताया था।
कड़े सुरक्षा इंतजामों के बावजूद, प्रतिबंधित ‘जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (जेएएसी) से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने कई इलाकों में सड़कें अवरुद्ध कीं और मौजूदा राजनीतिक स्थिति के विरोध में मतदान को रोक दिया। प्रदर्शनकारियों ने घनी आबादी वाले इलाकों जैसे गुजरा, तारिकाबाद, अपर प्लेट, सेंटर प्लेट, लोअर प्लेट, सामान बांडी और चेहला बांडी में सड़कें अवरुद्ध कीं, जिससे शहर में तनाव बना रहा। प्रदर्शनकारियों ने मीडिया की भी आलोचना की और आरोप लगाया कि उनकी शिकायतों को पर्याप्त जगह नहीं दी जा रही है।
जेएएसी कार्यकर्ता समूहों का एक संगठन है, जो विधानसभा की 12 विवादित सीट को लेकर लगभग दो महीने से प्रदर्शन कर रहा है। जेएएसी का आरोप है कि इन सीटों में हेरफेर करके अपनी पसंद के व्यक्ति को प्रधानमंत्री बनाने की कोशिश की जा रही है। जेएएसी के अनुसार, एक सप्ताह पहले हुए चुनाव के पहले चरण में सुरक्षा बलों के साथ झड़पों में 37 लोग मारे गए थे।
दूसरे चरण में मुजफ्फराबाद की नौ सीटों और 12 शरणार्थी सीटों पर कम मतदान दर्ज किया गया। इस क्षेत्र में कुल 45 सीट हैं, जिन पर तीन चरणों में चुनाव हो रहे हैं। इसका मुख्य उद्देश्य पूरे क्षेत्र में जेएएसी के प्रदर्शनों के प्रभाव को कम करना है।
पहले चरण में 27 जुलाई को मीरपुर डिवीजन की 13 सीट पर मतदान हुआ था। पीएमएल-एन ने नौ सीट जीतकर बहुमत हासिल किया, जबकि पीपीपी को चार सीट पर जीत मिली। पुंछ डिवीजन में नौ सीटों के लिए तीसरे चरण का मतदान 10 अगस्त को होगा।