By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 23, 2026
पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने शुक्रवार को कहा कि भारत तथा पोलैंड को पारंपरिक व्यापार से आगे बढ़कर प्रौद्योगिकी, कृत्रिम मेधा (एआई) और वैमानिकी के क्षेत्र में सहयोग गहरा करना चाहिए, ताकि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं मजबूत हो सकें। टस्क ने कहा कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को संयुक्त उद्यमों (जेवी) में बदलना चाहिए। यहां भारत-पोलैंड व्यापार मंच को संबोधित करते हुए टस्क ने कहा, ‘‘अब इन घोषणाओं को संयुक्त उद्यमों में बदलने का समय आ गया है।’’ उन्होंने दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करने और वैश्विक बाजारों तक उनकी पहुंच बनाने में मदद के लिए प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में अधिक सहयोग का आह्वान किया।
सूचना प्रौद्योगिकी एवं डिजिटलीकरण के क्षेत्र में पोलैंड के नेता ने भारत के बड़े आईटी सेवा क्षेत्र को अपने देश की सॉफ्टवेयर, क्लाउड समाधान, स्वचालन और साइबर सुरक्षा संबंधी विशेषज्ञता के साथ जोड़ने वाली साझेदारियों का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि पोलैंड की कंपनियां विशेष समाधान और यूरोपीय बाजारों का अनुभव उपलब्ध करा सकती हैं, जबकि भारतीय भागीदार उत्पादन एवं सेवाओं का विस्तार करने में मदद कर सकते हैं। टस्क ने डिजिटल सेवाओं का जिक्र करते हुए कहा कि भारत के यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) और पोलैंड की ऑनलाइन सरकारी सेवाओं तथा ‘एमओबायवाटेल’ डिजिटल पहचान ऐप से दोनों देश एक-दूसरे का अनुभव साझा कर सकते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हम मिलकर ऐसे सुरक्षित समाधान विकसित कर सकते हैं, जो नागरिकों और कारोबारियों के रोजमर्रा के जीवन को आसान बनाएं।’’ उन्होंने जोर दिया कि डिजिटलीकरण से उत्पादकता बढ़नी चाहिए, लागत कम होनी चाहिए और सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर होनी चाहिए। टस्क ने कहा कि द्विपक्षीय सहयोग में कृत्रिम मेधा (एआई) को विशेष स्थान मिलना चाहिए। औद्योगिक स्वचालन, डेटा विश्लेषण, निदान और बुनियादी ढांचे के प्रबंधन के लिए इसके अनुप्रयोग विकसित करने के अवसर हैं।
उन्होंने छोटे एवं मझोले उद्यमों के लिए उपकरण विकसित करने तथा मशीन लर्निंग और डेटा विश्लेषण के क्षेत्र में विश्वविद्यालयों एवं अनुसंधान संस्थानों के बीच अधिक सहयोग का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए साइबर सुरक्षा, सूचना संरक्षण और डिजिटल बुनियादी ढांचे की मजबूती एक साझा चुनौती होने के साथ-साथ नए कारोबारी अवसरों का क्षेत्र भी है।’’ सहयोग के दूसरे प्रमुख स्तंभ के रूप में वैमानिकी का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री टस्क ने भारत के चंद्रयान-3 मिशन का जिक्र किया, जो अगस्त 2023 में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव के पास उतरा था। उन्होंने यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ईएसए) में पोलैंड की भागीदारी का भी जिक्र किया।
प्रधानमंत्री टस्क ने कहा कि पोलैंड की कंपनियों और अनुसंधान केंद्रों को इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑप्टिकल प्रणालियों, सॉफ्टवेयर, वैज्ञानिक उपकरणों और उपग्रह डेटा के विश्लेषण में विशेषज्ञता हासिल है। उन्होंने इन पूरक क्षमताओं का संयुक्त रूप से इस्तेमाल करने का आह्वान किया। पोलैंड की अंतरिक्ष कंपनियां पहले से ही उपग्रह के कलपुर्जों, पृथ्वी के अवलोकन, नेविगेशन सॉफ्टवेयर, डेटा विश्लेषण, अंतरिक्ष सुरक्षा और दोहरे उपयोग वाले समाधानों के क्षेत्र में भारतीय भागीदारी की संभावनाएं तलाश रही हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘यदि हम मिलकर किसी अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष मिशन में भाग ले सकते हैं, तो हमें यहां पृथ्वी पर भी विशिष्ट औद्योगिक परियोजनाएं विकसित करनी चाहिए।’’ पोलैंड के प्रधानमंत्री ने साथ ही कहा कि दोनों देशों के स्टार्टअप और अनुसंधान दलों को निवेशकों तथा ग्राहकों तक पहुंच की जरूरत है। उन्होंने 2025 में ‘बेंगलुरु टेक समिट’ में पोलैंड की भागीदारी का उल्लेख किया और कहा कि उनका देश इस साल नवंबर में होने वाले आयोजन में फिर शामिल होगा। उन्होंने कहा, ‘‘आइए, हम सिर्फ भविष्य की प्रौद्योगिकियों का इस्तेमाल न करें, बल्कि उन्हें मिलकर विकसित करें और वैश्विक बाजारों में भी मिलकर पेश करें।’’