Russian oil पर भारत-अमेरिका तनाव के बीच पोलैंड ने भारत का किया समर्थन

By Ankit Jaiswal | Jan 08, 2026

रूस से तेल खरीद को लेकर भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच पोलैंड ने खुलकर नई दिल्ली का समर्थन किया है। बता दें कि पोलैंड ने कहा है कि वह भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल के आयात में की गई कटौती से संतुष्ट है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब यूक्रेन युद्ध के संदर्भ में अमेरिका भारत पर लगातार दबाव बना रहा है।

पेरिस में बुधवार को वीमर ट्रायंगल समूह की बैठक के बाद पोलैंड के विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की ने कहा कि भारत द्वारा रूसी तेल आयात घटाने का कदम स्वागतयोग्य है, क्योंकि इससे रूस की युद्ध क्षमता को मिलने वाली आर्थिक मदद सीमित होती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस मुद्दे पर भारत के साथ आगे चर्चा की जा सकती है और वह अगले सप्ताह भारत दौरे के दौरान इस पर विस्तार से बात करेंगे हैं।

इस बैठक में भारत की ओर से विदेश मंत्री एस. जयशंकर शामिल हुए, जबकि फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरो और जर्मनी के प्रतिनिधि भी मौजूद थे। गौरतलब है कि यह भारत की वीमर ट्रायंगल प्रारूप में पहली औपचारिक भागीदारी रही है, जिसे यूरोप के प्रमुख देशों के साथ भारत के बढ़ते संवाद के रूप में देखा जा रहा है।

मौजूद जानकारी के अनुसार, वीमर ट्रायंगल की स्थापना 1991 में फ्रांस, जर्मनी और पोलैंड ने यूरोपीय एकीकरण, राजनीतिक संवाद, सुरक्षा सहयोग और विशेष रूप से रूस-यूक्रेन जैसे मुद्दों पर समन्वय के लिए की थी। भारत की इस मंच पर मौजूदगी को यूरोपीय देशों के साथ रणनीतिक सहयोग को और गहरा करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

दूसरी ओर, भारत और अमेरिका के रिश्तों में हाल के महीनों में तनाव बढ़ा है। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप पहले भी भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक शुल्क लगा चुके हैं और अब एक द्विदलीय विधेयक को मंजूरी दी गई है, जिसके तहत रूस से तेल या यूरेनियम खरीदने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम के अनुसार, इस विधेयक पर जल्द ही मतदान संभव है।

गौरतलब है कि ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मुद्दे पर उनकी नाराजगी की जानकारी है और जरूरत पड़ी तो शुल्क बहुत तेजी से बढ़ाए जा सकते हैं। इससे पहले भारत पर 25 प्रतिशत पारस्परिक शुल्क और रूसी तेल खरीद से जुड़ा अतिरिक्त 25 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क लगाया गया था, जिससे कुछ उत्पादों पर कुल टैक्स 50 प्रतिशत तक पहुंच गया है।

कुल मिलाकर, रूस से तेल आयात को लेकर भारत की संतुलित नीति एक ओर जहां घरेलू ऊर्जा सुरक्षा से जुड़ी है, वहीं दूसरी ओर वैश्विक कूटनीति और पश्चिमी देशों के साथ संबंधों की परीक्षा भी बन गई है, जिसमें पोलैंड का समर्थन भारत के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत के रूप में देखा जा रहा हैं।

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