Sonam Raghuvanshi Get Bail | पुलिस की एक 'टाइपिंग एरर' और हत्या की आरोपी सोनम को मिली राहत, मेघालय हनीमून मर्डर केस में बड़ा कानूनी मोड़

By रेनू तिवारी | Apr 29, 2026

कानून की दुनिया में एक छोटी सी चूक भी बड़े परिणामों का कारण बन सकती है। मेघालय में अपने हनीमून के दौरान पति की हत्या की आरोपी सोनम रघुवंशी को अदालत ने जमानत दे दी है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में सोनम की रिहाई का रास्ता किसी सबूत के अभाव ने नहीं, बल्कि पुलिस की एक 'टाइपिंग की गलती' ने साफ किया है। 

मेघालय की एक अदालत ने पाया कि पुलिस ने सोनम के 'गिरफ्तारी मेमो' और अन्य कानूनी दस्तावेजों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की ऐसी धारा का उल्लेख किया था, जो असल में कानून की किताब में मौजूद ही नहीं है।

गलती का गणित: पुलिस ने दस्तावेजों में धारा 403(1) का जिक्र किया था। आपको बता दें कि नई संहिता (BNS) में हत्या की सही धारा 103(1) है।

अदालत का तर्क: पुलिस ने इसे "क्लर्कियल मिस्टेक" (कागजी भूल) बताया, लेकिन अदालत ने इस दलील को खारिज कर दिया। जज ने कहा कि यदि गिरफ्तारी के मेमो में गलत धारा लिखी है, तो इसका मतलब है कि आरोपी को "गिरफ्तारी के ठोस आधार" नहीं बताए गए।

अदालत का निष्कर्ष "भारतीय न्याय संहिता (BNS) में धारा 403(1) जैसी कोई चीज नहीं है। यह गिरफ्तारी कानूनी रूप से वैध नहीं मानी जा सकती।"

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अदालत के आदेश के मुताबिक, सोनम रघुवंशी के 'गिरफ़्तारी मेमो', 'जाँच मेमो', 'अधिकारों की सूचना वाले मेमो', और यहाँ तक कि 'केस डायरी' में की गई एंट्रीज़ में भी 'भारतीय न्याय संहिता' की एक ऐसी धारा 403(1) का ज़िक्र था, जिसका असल में कोई वजूद ही नहीं है।

पुलिस की इस दलील को कि यह सिर्फ़ एक "क्लर्कियल गलती" थी, खारिज करते हुए अदालत ने कहा कि आरोपी महिला को "गिरफ़्तारी के ठोस आधार" नहीं बताए गए थे; इस वजह से यह गिरफ़्तारी कानूनी तौर पर मान्य नहीं मानी जा सकती।

कानूनी मदद (वकील) तक पहुँच का कोई सबूत नहीं

अदालत ने एक और बड़ी चूक की ओर भी इशारा किया। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई भी सबूत मौजूद नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि गिरफ़्तारी के बाद जब सोनम को पहली बार ग़ाज़ीपुर की अदालत में पेश किया गया था, तब उन्हें किसी वकील से मिलने या कानूनी सलाह लेने का मौका दिया गया था।

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इस वजह से, वह गिरफ़्तारी की प्रक्रिया में मौजूद इन कमियों या गलतियों को शुरुआती दौर में ही अदालत के सामने चुनौती नहीं दे पाईं।

शर्तों के साथ ज़मानत

ज़मानत देते समय, अदालत ने कुछ शर्तें भी रखीं। अदालत ने निर्देश दिया कि सोनम बिना पहले से इजाज़त लिए शिलॉन्ग ज़िले की सीमा से बाहर नहीं जा सकतीं।

सोनम के भाई, गोविंद रघुवंशी ने बताया कि परिवार अभी भी अदालत के लिखित आदेश का इंतज़ार कर रहा है। उन्हें अभी यह साफ़ तौर पर पता नहीं है कि सोनम को तुरंत रिहा किया जाएगा या नहीं, और रिहा होने के बाद उनके रहने का क्या इंतज़ाम होगा।

उन्होंने कहा, "मुझे भी यह पता चला है कि सोनम को ज़मानत मिल गई है, लेकिन अदालत का लिखित आदेश अभी आना बाकी है। मुझे नहीं पता कि उन्हें कब रिहा किया जाएगा और रिहा होने के बाद वह कहाँ रहेंगी।"

उन्होंने आगे बताया कि हो सकता है कि परिवार सोनम को तुरंत अपने घर वापस न ले जाए। “हम अभी उसे घर में नहीं रखेंगे। अगर मेरे माता-पिता उसे घर लाना चाहते हैं, तो मैं घर पर नहीं रहूंगा।”

मामले की पृष्ठभूमि

सोनम रघुवंशी पर आरोप है कि उसने मेघालय में अपने हनीमून के दौरान अपने पति, राजा रघुवंशी की हत्या की साज़िश रची थी। इस जोड़े ने मई 2025 में शादी की थी और इंदौर से शिलांग गए थे। कुछ दिनों बाद राजा लापता हो गया, और 2 जून को एक खाई में उसका शव मिला। पुलिस ने आरोप लगाया है कि सोनम ने इस हत्या में कई लोगों के साथ मिलकर साज़िश रची थी। इस मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से तीन को पहले ही ज़मानत मिल चुकी है। चूंकि अदालत ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया में गंभीर खामियां पाई हैं, इसलिए अब यह मामला एक कानूनी चुनौती का सामना कर रहा है, जो आगे चलकर इस मामले की दिशा तय कर सकती है, भले ही जांच अभी भी जारी है।

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