By संतोष उत्सुक | Apr 02, 2025
राजनीतिक पार्टियां अपने कर्मठ कार्यकर्ताओं, बेरोजगार और विद्यार्थियों के सहयोग से एक दूसरे के नेताओं के पुतले अब कम फूंकती हैं। गर्मी के मौसम में काफी मुश्किल होती है। आजकल छोटे से छोटा नेता भी अपनी कुनीतियों की राजनीति बढ़िया ढंग से चमकाना चाहता है। वह इस काम को संजीदा स्टार्टअप की तरह लेता है। राजनीतिक स्टार्टअप के लिए तो कई व्यवसायी और अनुभवी बंदे इन्वेस्टर बनने को भी तैयार होते हैं। उन्हें पता होता है बंदा राजनीति में चल निकला तो देश की सेवा के साथ उनकी भी खूब सेवा करेगा। माफ़ करें बात कहीं और जा रही है, हमें बात पुतलों की करनी है।
पुतले को अपने महंगे जूतों से ठोकर मारकर या हॉकी की स्टिक से पीटकर अपनी व्यक्तिगत खुनूस भी निकाली जा सकती है। पुतले बनाने के लिए पुराने जूते चप्पलें, फटे कपडे, कूड़े कचरे का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। इस आयोजन का शुभारंभ, पार्टी के ऐसे नेता कर सकते हैं जिन्हें कभी उदघाटन का अवसर नहीं मिला। छोटे स्तर के नेताओं के पुतले पीटने शुरू किए जाएं तो उन्हें अपने राजनीतिक कैरियर में शीघ्र पहचान मिलने के अवसर बढ़ सकते हैं। सच पूछिए तो वे पुतला पीटने के आयोजन को प्रायोजित भी कर सकते हैं। ठंडे पानी, लस्सी, छाछ या तरबूज वितरण का आयोजन भी हो सकता है जो वोटरों व राजनीतिक कार्यकर्ताओं की संख्या में बढ़ोतरी करवा सकता है।
गर्मी के जला देने वाले मौसम को ध्यान में रखकर छोटा स्टार्टअप शुरू किया जा सकता है जिसका विज्ञापन कुछ ऐसा हो सकता है। ‘नेताओं के पुराने लेकिन महंगे जूतों और कपड़ों से बनाए बेहतरीन कवालिटी के पुतले चौबीस घंटे तैयार मिलते हैं। पीटने के लिए ठंडे पानी में डुबोए जूते व पहनाने के लिए फटी पुरानी लेकिन सुगंधित चप्पलों की मालाएं उपलब्ध हैं। पुतलों के साथ टोपी मुफ्त दी जाती है। दो पुतले एक साथ लेने पर दस प्रतिशत और चुनाव के दौरान खरीदने पर तेतीस प्रतिशत की छूट का लाभ उठा सकते हैं।
- संतोष उत्सुक