राजनीतिक दलों ने बंगाल में पंचायत चुनाव में हिंसा की निंदा की, भाजपा ने की राष्ट्रपति शासन की मांग

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Jul 08, 2023

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के लिए शनिवार को मतदान जारी है और विभिन्न जिलों में चुनाव संबंधी हिंसा में 11 लोग मारे गए हैं। सभी पार्टियों ने एक सुर में चुनाव संबंधी हिंसा में लोगों की मौत की निंदा की है। विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाये जाने की मांग की है। चुनाव संबंधी हिंसा में अपने छह समर्थकों को खोने वाली सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने विपक्षी दलों पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया और मतदाताओं की सुरक्षा करने में विफलता के लिए केंद्रीय बलों की आलोचना की।

इसे भी पढ़ें: राजस्थान चुनाव में ‘सामूहिक नेतृत्व’ ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता: सचिन पायलट

भाजपा, माकपा और कांग्रेस ने साठगांठ की थी और केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग की थी। आखिर वे कहां तैनात हैं? तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं की हत्या की जा रही है। केंद्रीय बल कहां हैं?’’ टीएमसी ने एक बयान में कहा कि आठ जून को पंचायत चुनाव की घोषणा होने के बाद से 27 लोग मारे गए हैं और उनमें से 17 लोग तृणमूल से हैं, जो कुल मौतों का 60 प्रतिशत से अधिक है। इसमें कहा गया है, ‘‘यदि तृणमूल कांग्रेस वास्तव में हिंसा भड़काती है, जैसा कि मीडिया आरोप लगा रही है, तो उनके कार्यकर्ताओं को निशाना क्यों बनाया जाता और उनकी हत्या क्यों की जाती है? विपक्ष ने हार मान ली है और अब वह मीडिया में अपने सहयोगियों का इस्तेमाल करके यह कहानी गढ़ने का प्रयास कर रहा है कि हिंसा ने चुनाव को किस तरह प्रभावित किया।’’ बयान में कहा गया है कि पूरे पश्चिम बंगाल में 60 हजार से अधिक बूथ हैं लेकिन केवल 60 बूथ पर ही मतदान प्रक्रिया के दौरान व्यवधान पड़ा है और हिंसा की एक भी घटना की सूचना नहीं मिली है। राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता एवं भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने मांग की कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जाए।

उन्होंने कहा, ‘‘राज्य सरकार के तहत स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संपन्न होना बहुत मुश्किल है। यह तभी संभव है जब राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया जाये या अनुच्छेद 355 का इस्तेमाल किया जाये।’’ संविधान की धारा 355 में कहा गया है कि राज्यों को आंतरिक अशांति और बाहरी हमले से बचाना संघ का कर्तव्य है। भाजपा नेता राहुल सिन्हा ने दावा किया कि राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार के निर्देशानुसार काम कर रहा है और वह अपने कर्तव्यों का पालन करने में पूरी तरह से विफल रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘जिस तरह से वे आज मतदान करा रहे हैं उससे यह स्पष्ट है। कई बूथ पर कोई केंद्रीय बल तैनात नहीं है, जबकि कुछ में राज्य पुलिस की भी मौजूदगी नहीं है। मुझे तस्वीरें और वीडियो भी मिले हैं जहां सीसीटीवी तारों से भी नहीं जुड़े थे। इससे वास्तव में उपद्रवियों को हिंसा करने में मदद मिली।’’ माकपा नेता सलीम ने कहा, ‘‘कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद केंद्रीय बलों की उचित ढंग से तैनाती नहीं की गई है।’’

माकपा के वरिष्ठ नेता सुजान चक्रवर्ती ने दावा किया, ‘‘हथियारों का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है और इन सभी घटनाओं के पीछे सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस का हाथ है। उन्होंने चुनाव के दिन व्यवधान पैदा करने और मतपेटियों की लूट के इरादे से पहले ही इसकी साजिश रच ली थी। लेकिन मुझे यह देखकर खुशी है कि कुछ जगहों पर लोगों ने इसका विरोध किया।’’ चक्रवर्ती ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मैं यह देखकर हैरान हूं कि कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश के मुताबिक केंद्रीय बलों की तैनाती नहीं की गई। ऐसा लगता है कि कुछ समझौता हुआ है... यह पूरी तरह से अदालत के आदेश का उल्लंघन है।’’ कांग्रेस नेता अधीर चौधरी ने कहा कि चुनाव एक मजाक बन गया है क्योंकि ‘‘टीएमसी के गुंडे खुलेआम घूम रहे हैं और लोगों का जनादेश लूट लिया गया है।

प्रमुख खबरें

Nagpur में Chlorine Gas का रिसाव होने से कई लोग अस्पताल में भर्ती, NDRF तैनात

Explained India-China Border Dispute | सीमा विवाद सुलझाने की दिशा में बड़ा कदम! NSA डोभाल की बीजिंग यात्रा क्यों है भारत-चीन संबंधों के लिए अहम?

FTA पर नए समझौतों से जुड़ेगा 15 हजार अरब डॉलर का बाजार, बोले Piyush Goyal

Kannur में भीषण Road Accident, खड़े ट्रक से टकराई लॉरी; 2 मैकेनिकों की मौत