एमपी में ओबीसी और दलित वर्ग को साधने में जुटी राजनीतिक पार्टियां, जानिए क्या है समीकरण

By सुयश भट्ट | Feb 15, 2022

भोपाल। मध्य प्रदेश में मिशन 2023 की तैयारियां शुरू हो गई हैं। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां अपने-अपने वोटरों को साधने में जुटी हुई है। बीजेपी ने इसकी शुरुआत बूथ विस्तारक अभियान से की। और इसी के साथ साथ बीजेपी समर्पण निधि अभियान के तहत चंदा भी इकट्ठा कर रही है।

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अब बात आती है ओबीसी वर्ग की जिसे साधने के लिए बीजेपी और कांग्रेस अलग-अलग हथकंडे अपना रही है। ओबीसी वर्ग को साधना मध्य प्रदेश में इसलिए भी जरूरी माना जाता है जो कि लगभग 51% वोटर ओबीसी वर्ग के हैं। और इस वर्ग का वोट पाना एक तरह से सरकार को बहुमत दिलाने में काफी मददगार साबित होगा।

बीजेपी-कांग्रेस दोनों ही दल रविदास जयंती पर कार्यक्रमों का आयोजन कर रहे हैं। बीजेपी जहां बड़े स्‍तर पर रविदास जयंती मनाने जा रही है। वहीं कांग्रेस भी सागर में रविदास जयंती मनाएगी। कांग्रेस के आयोजन पर प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग ने पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि हम भगवान रविदास की जयंती पहले से मनाते आए हैं। कांग्रेस को बड़ी देर से याद आयी है।

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वहीं कांग्रेस नेता अजय सिंह यादव ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए बताया कि मध्य प्रदेश में पिछड़ा वर्ग को 27% आरक्षण का हक और अधिकार कांग्रेस  सरकार ने दिया है। बीजेपी पिछड़े वर्गो के साथ धोखा कर रही थी। और इसलिए मध्यप्रदेश के विभिन्न पिछड़ा वर्ग संगठनों ने 15 फरवरी को भोपाल में बड़ा आयोजन रखा है। जिसमें कमलनाथ के प्रति प्रति आभार और धन्यवाद ज्ञापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही प्रदेश का पिछला वर्ग दृढ़ संकल्पित है कि 2023 में कमलनाथ जी के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनानी है।

आपको बता दें मध्य प्रदेश में आदिवासी वर्ग के लिए 35 सीटें आरक्षित हैं। इन सीटों के अलावा भी कई सीटों पर दलित वर्ग का भी प्रभाव देखने को मिलता है। इसलिए दलित वर्ग को खुश रखना दोनों ही दल के लिए बेहद जरूरी है।

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अगर हम पिछले विधानसभा चुनाव की बात करे तो बीजेपी को इन्हीं सीटों पर नुकसान हुआ था। 2013 की तुलना में अनुसूचित जाति वर्ग की 10 सीटों का नुकसान बीजेपी को हुआ था। और इसलिए सभी दलित वर्ग को साधने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं।

वहीं मध्य प्रदेश में ओबीसी वर्ग को लेकर लंबे समय से सियासत जारी है। ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण मिलने के बाद बीजेपी और कांग्रेस में श्रेय लेने की रेस देखने को मिल रही है। और दोनों दल दावा कर रहे हैं कि उनके कारण ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण मिला है।

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हाल ही में देखा गया था कि मध्य प्रदेश में आदिवासी वोटरों को साधने के लिए बीजेपी सरकार ने रानी कमलापति, बिरसा मुंडा और टंट्या मामा जैसे महापुरुषों की जयंती मनाई थी इसी के साथ-साथ राजधानी भोपाल के हबीबगंज स्टेशन का नाम बदलकर रानी कमलापति के नाम पर कर दिया था। वहीं टंट्या मामा की जयंती पर उनकी मूर्ति का अवलोकन भी किया गया था। बीजेपी के कई मंत्रियों ने शिवराज सिंह चौहान की तुलना टंट्या मामा से की थी।

आपको बता दें कि जातिगत आधार पर मध्य प्रदेश के वोटरों को देखें तो लगभग 51% ओबीसी वर्ग के वोटर हैं। 22% वोटर आदिवासी, 16% दलित वोटर हैं। और 11% सामान्य वोटर है। देखा जाता है कि सबसे ज्यादा प्रतिशत ओबीसी वर्ग का है और उसके बाद आदिवासी। इन्हीं को साधने के लिए बीजेपी और कांग्रेस अलग-अलग अभियान चला रही है।

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