By अंकित सिंह | May 22, 2026
शुक्रवार को विदुथलाई चिरुथाइगल काची और आईयूएमएल के टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल होने के बाद डीएमके और उसके पूर्व सहयोगी वीसीके के बीच तीखी नोकझोंक हुई। इस फैसले से वफादारी और गठबंधन की राजनीति को लेकर तीखी आलोचना और राजनीतिक खींचतान शुरू हो गई। यह जुबानी जंग तब शुरू हुई जब वीसीके और इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल), जो 2026 के विधानसभा चुनाव तक डीएमके के सहयोगी थे, ने टीवीके सरकार को समर्थन दिया। विधानसभा में टीवीके को साधारण बहुमत के 118 अंक नहीं मिले।
X पर एक पोस्ट में राजा ने इशारों-इशारों में कहा कि अगर मेरे बगीचे का नारियल का पेड़ झुककर पड़ोसी को कच्चा नारियल दे, तो साहित्य में उसे 'मुत्तथेंगु' (आंगन का पेड़) कहा जाएगा। राजनीति में हम इसे क्या नाम दें? उन्होंने पोस्ट का अंत "तमिल जिंदाबाद" कहकर किया। वीसीके और आईयूएमएल ने पहले स्पष्ट किया था कि टीवीके सरकार को उनका समर्थन तमिलनाडु में राष्ट्रपति शासन को रोकने के उद्देश्य से था, और उन्होंने यह भी कहा था कि डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन को उनके स्वतंत्र निर्णय की जानकारी दे दी गई थी।
कांग्रेस और वामपंथी दलों ने भी टीवीके को सरकार बनाने में समर्थन दिया। राजा की टिप्पणियों पर पलटवार करते हुए वीसीके ने कहा कि वह अन्य पार्टियों की दया पर नहीं पनपी और जोर देकर कहा कि उसका राजनीतिक आधार शोषित समुदायों के पसीने और खून से बना है। वीसीके ने एक्स पर कहा कि दल-बदल के बारे में बात करने का अन्य दलों को क्या अधिकार है? किसका इतिहास है कि उन्होंने कांग्रेस को हराने के लिए संघ परिवार (भाजपा) के साथ गठबंधन किया? किसका 'स्वार्थ' है कि वे वाजपेयी मंत्रिमंडल का हिस्सा थे और फिर उसी भाजपा का विरोध किया? तमिलनाडु ने ऐसे कई राजनीतिक नाटक देखे हैं।
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