आर्थिक मोर्चे पर विकास के सकारात्मक संकेत

By डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा | Oct 24, 2026

विपरीत वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद दुनिया भर की रेटिंग संस्थाओं ने भारतीय अर्थव्यवस्था को गतिमान स्वीकार करते हुए वैश्विक औसत से लगभग दो गुणी विकास दर रहने की संभावना जताई है। यह इसलिए महत्वपूर्ण हो जाता है कि वैश्विक परिस्थितियों में कहीं और किसी तरह का सुधार नहीं दिखाई दे रहा है। ईरान-अमेरिका युद्ध हो या रूस-यूक्रेन युद्ध हो या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के तानाशाही पूर्ण तुगलकी निर्णय हो या कच्चे तेल के भावों में बेतहासा बढ़ोतरी और हार्मुज का संकट हालात समूचे विश्व में विकट से विकटतर बने हुए हैं। अब तो फ्रांस के हालात भी बिगड़ते जा रहे हैं तो उसका असर जहां योरोप में दिखाई देगा वहीं भारत में भी हालात को प्रभावित करने के कतिपय प्रयास जारी है। अच्छी बात यह है कि देश-दुनिया के गंभीर हालातों के बावजूद आर्थिक क्षेत्र की दुनिया की लगभग सभी रेटिंग संस्थाओं ने इंडियन इकोनोमी की ग्रोथ रेट को लेकर आशा से भी अधिक विश्वास जताया है। रेटिंग संस्थाओं की ही माने तो 2026 की वैश्विक औसत आर्थिक विकास दर 3 दशमलव 1 फीसदी रहने की संभावना व्यक्त की जा रही है वहीं दुनिया की रेटिंग संस्थाओं ने भारत के आर्थिक परिणामों को देखते हुए जुलाई की तुलना में अक्टूबर आते आते ग्रोथ को 6 दशमलव 9 से लेकर 7 दशमलव 1 रहने की उम्मीद जताई है। खास बात यह है कि विश्व रेटिंग संस्थाओं में से किसी भी संस्था ने जुलाई की रेटिंग की तुलना में नकारात्मक ग्रोथ नहीं दिखा कर ग्रोथ रेट में इजाफा ही जाहिर किया है।

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यह पिछली दीपावली की तुलना में 15 प्रतिशत से 18 प्रतिशत तक अधिक रहने की संभावना है। इसी तरह से सेवा क्षेत्र में भी अच्छी ग्रोथ जारी रहने का अनुमान है। इसके अलावा विपरीत हालातों के बावजूद निर्यात में लगातार बढ़ोतरी जारी है। देश की इकोनोमिक ग्रोथ के कारण देसी-विदेशी निवेश के बेहतर हालात दिखाई दे रहे हैं। यही कारण है कि चाहे आईएमएफ हो या मूडीज, ओईसीडी हो या वर्ल्ड बैंक, एशियन डब्लपमेंट बैंक हो या एसएण्डपी या फिच सभी ने भारत की इकोनोमी की ग्रोथ को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं। भारत का आरबीआई का आंकलन तो पहले से ही सबके सामने हैं। एकमात्र फिच रेटिंग संस्था ऐसी है जिसने इंडियन इकोनोमी की ग्रोथ रेट 6.9 प्रतिशत आंकी है जोकि हांलाकि पूर्व की फिच की ही पूर्व की रेटिंग 6.5 प्रतिशत से ही अधिक है। मूडीज सहित कुछ रेटिंग संस्थाओं ने जहां अब 7 प्रतिशत विकास दर आंक रहे हैं तो वर्ल्ड बैंक, ओईसीडी आदि संस्थाओं को भरोसा है कि भारत की आर्थिक विकास दर 7 प्रतिशत से अधिक यानी की 7.1 प्रतिशत रहने की संभावना है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नित नए निर्णयों से दुनिया की अर्थ व्यवस्था पर पड़ रहे असर, युद्ध और तनाव के हालातों में सुधार नहीं होने, हार्मुज जैसी समस्या का समाधान नहीं होने, वैश्विक राजनीतिक अस्थिरता के दौर के बावजूद एक ही सधी हुई नीति का ही परिणाम है कि देश की अर्थ व्यवस्था विकास की गति को ना केवल बनाए हुए हैं अपितु उसकी विकास का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है। इसके लिए समग्र और समन्वित प्रयासों को श्रेय जाता है। जहां घरेलू मांग में कमी नहीं आई है वहीं निवेश का बेहतर माहौल बना हुआ है। एमएसएमई को उत्पादन लिंक प्रोत्साहन योजना का लाभ सीधे इकोनोमी का मिल रहा है वहीं रणनीतिक क्षेत्रों सेमीकण्डक्टर, डिफेंस, इलेक्ट्रोनिक्स, आईटी आदि आदि क्षेत्रों में योजनाबद्ध तरीके से आगे बढ़ा जा रहा है। यही कारण है कि आज इंडियन इकोनोमी और उसकी ग्रोथ पर वैश्विक रेटिंग संस्थाएं अपना विश्वास व्यक्त कर रही है।

- डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा

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