गड्ढों की मरम्मत (व्यंग्य)

By संतोष उत्सुक | Feb 28, 2026

बरसात की पारम्परिक गलती के कारण सड़क पर नए गड्ढे बन गए थे, पुराने गड्ढे बड़े और  जिन गड्ढों में रोड़े और मिटटी भरी थी निकल गई थी । गड्ढों की लम्बाई, चौड़ाई व गहराई बढ़ती ही गई । कई गड्ढे अब खड्डों की तरह दिखते थे । इतने गड्ढे हो गए, लगता सड़क के साथ भीषण दुर्घटना हुई जिससे बेचारी के शरीर पर दर्जनों जख्म हो गए हों  । दोपहिया वाहन चालकों और पैदल चलने वालों को अब तक मुसीबतें झेलनी पड़ रही हैं ।  अनहोनी घटना कभी भी घट सकती है। 

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इस बार की महत्त्वपूर्ण बैठक में सड़कों की गुणवत्ता सुधारने और पैच वर्क को अधिक टिकाऊ बनाने के लिए, सख्त नियमावली का प्रारूप बनाया गया जो राष्ट्रीय मानकों पर आधारित रहा  । ऐसा लगा अब एक भी गड्ढा बिना उच्च कोटि की मरम्मत किए बिना नहीं छोड़ा जाएगा। मरम्मत वाले क्षेत्र को वर्गाकार या आयताकार आकार में काटना ज़रूरी होगा, जिसमें सभी किनारे नब्बे डिग्री पर होने चाहिएं।  गड्ढे में से धूल हटाने के लिए बढ़िया एयर ब्लोअर का प्रयोग करना होगा। गड्ढे के तल और दीवारों पर बिटुमेन इमल्शन की पतली परत लगाना ज़रूरी है ताकि नई सामग्री मजबूती से चिपक सके। 

यदि गड्ढा तीन या पांच इंच से ज़्यादा गहरा है तो भरने के बाद मशीन  से दबाया जाएगा । पैच का स्तर सड़क से तीन एमएम ऊंचा रखा जाएगा ताकि वहां पानी, धूल और मिटटी प्रवेश न कर सके। अब खड्डे की मरम्मत से पहले, मरम्मत के दौरान और मरम्मत के बाद, सम्बंधित अधिकारी के साथ रंगीन फोटो ली जाएगी। इस तरह गड्ढों का नाम मरम्मत के इतिहास में सचित्र दर्ज हो जाएगा। दो वर्ष के भीतर अगर उसी स्थान पर दोबारा गड्ढा हुआ तो मरम्मत को विफल माना जाएगा । फिर समझदार लोगों की कमेटी बिठाकर, कारणों की गहन जांच की जाएगी, जिसके तहत जवाबदेही भी तय की जा सकती है।

इस नई योजना बनाए जाने के सुअवसर पर पत्रकारों को मौक़ा पर ही चाय पान और समोसा खान के लिए बुलाया गया। सूचित किया गया कि अब गड्ढों की किस्मत बदलने वाली है। सामने दिख रहे गड्ढे खुश दिख रहे थे। उन्हें पता था मरम्मत जल्दी हो न हो लेकिन आने वाले दिनों में अखबारों में उनकी फोटो छपेगी, सोशल मीडिया पर रीलें घूमेंगी और उन्हें भी कमेंट्स मिलेंगे। 

यह कमाल की व्यवस्था की जा रही है। वास्तव में उच्च कोटि का प्रशासनिक इंतजाम किया जा रहा है। वहां से गुज़र रहे इंसान सोचेंगे ज़रूर, कि हम से बेहतर मरम्मत तो गड्ढों की होने जा  रही है।     

- संतोष उत्सुक

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