हिंद महासागर में चल रहा शक्ति प्रदर्शन..., राजनाथ सिंह ने मजबूत समुद्री तैयारी पर दिया जोर

By अंकित सिंह | Aug 26, 2025

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा कि देश के पूर्वी हिस्से में सुरक्षा चुनौतियों और हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) में शक्ति-संचालन की गतिशीलता के कारण भारत को अपनी समुद्री तैयारियों को मज़बूत बनाए रखने की आवश्यकता है। आंध्र प्रदेश में भारतीय नौसेना की पूर्वी नौसेना कमान में दो स्टील्थ फ्रिगेट के जलावतरण के अवसर पर बोलते हुए, सिंह ने कहा कि जब हम पूर्वी हिस्से की ओर देखते हैं, तो हमें वहाँ भी समान सुरक्षा चुनौतियाँ दिखाई देती हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत की ऊर्जा आवश्यकताएं, जैसे तेल और प्राकृतिक गैस, काफी हद तक हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा पर निर्भर करती हैं। उन्होंने कहा कि नौसेना की भूमिका केवल समुद्र में गश्त तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह भारत की राष्ट्रीय आर्थिक सुरक्षा का एक प्रमुख स्तंभ है। सिंह ने आगे कहा कि भारत का उद्देश्य अपनी नौसैनिक शक्ति का प्रदर्शन करना नहीं है और वह आक्रामक विस्तारवाद में विश्वास नहीं रखता, लेकिन जब उसकी सुरक्षा को खतरा होगा तो वह पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया जानती है कि हमने कभी किसी देश पर पहले हमला नहीं किया। हमने कभी किसी को उकसाने की कोशिश नहीं की।

राजनाथ सिंह ने कहा कि पहलगाम में हुए उस कायराना हमले को ज़्यादा दिन नहीं बीते। आतंकवादियों ने निर्दोष लोगों का धर्म पूछकर उनकी हत्या कर दी। हमारे निर्दोष नागरिकों पर वह हमला हमें उकसाने के लिए किया गया था। बिना उकसावे में आए, बहुत सोच-विचार के बाद, हमने एक प्रभावी और सटीक जवाब दिया। हमने ऑपरेशन सिंदूर शुरू करके आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने का फैसला किया और उसे अंजाम दिया।

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रक्षा मंत्री ने कहा कि हमारे देश ने बार-बार यह दिखाया है कि जब कोई चुनौती आती है, तो हम उसका सामना करने के लिए एकजुट होते हैं और विजयी होते हैं। राष्ट्रीय एकता, अनुशासन, त्याग और समर्पण ही हमारी असली ताकत है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में पूरा देश आतंकवाद के खिलाफ एकजुट है। राजनाथ सिंह ने यह भी कहा कि भारत के लिए खुद को अपडेट रखना और आज के बदलते युद्ध स्वरूप में नए समाधान तलाशना ज़रूरी है। उन्होंने कहा, "पुरानी सोच आज काम नहीं आएगी। हमें नए खतरों का भी अनुमान लगाना होगा और नए समाधानों के बारे में सोचते रहना होगा। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हमारी सरकार ने भी इसे समझा है और रक्षा क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को प्राथमिकता दी है।"

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