पीपीपी नेता ने बताया पाकिस्तान में फौज का सच, कहा- सेना ने कभी संविधान को नहीं माना

By प्रभासाक्षी न्यूज नेटवर्क | Oct 14, 2020

वाशिंगटन। पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (पीपीपी) के प्रवक्ता ने पाकिस्तान के भारत के साथ संबंधों का आधार बदलने की अपील करते हुए कहा है कि पाकिस्तान की शक्तिशाली सेना अपने आर्थिक हितों की रक्षा करने की कोशिश कर रही है, जो एक संघीय एवं लोकतांत्रिक प्रणाली में शायद संभव नहीं है और यही देश में ‘‘धीरे-धीरे तख्तापलट’’ का कारण है। पीपीपी के प्रवक्ता एवं पूर्व सांसद फरहातुल्ला बाबर ने ‘साउथ एशियंस अगेन्स्ट टेरेरिज्म एंड फॉर ह्यूमन राइट्स’ (साथ) के पांचवें वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि पाकिस्तान की संसद सेना को जवाबदेह ठहराने में सक्षम नहीं है। उन्होंने एक वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से सम्मेलन में कहा, ’’पाकिस्तान के जनरल देश के संविधान को दिल से स्वीकार नहीं करते है। इसलिए उन्होंने राष्ट्र में ऐसी स्थिति पैदा की है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है और सेना को सभी संस्थाओं से ऊपर रखती है।’’ बाबर ने भारत के साथ पाकिस्तान के संबंधों का आधार बदलने की अपील की। उन्होंने कहा, ‘‘यदि संघर्षों के बावजूद चीन और भारत के बीच व्यापार संबंध हो सकते हैं, तो पाकिस्तान ऐसा क्यों नही कर सकता?’’ बाबर ने इशारा किया कि भारत के साथ अच्छे संबंधों से पाकिस्तान में लोकतांत्रिक नियम और आम नागरिकों की सर्वोच्चता स्थापित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में ‘‘धीरे-धीरे तख्तापलट’’ का कारण शक्तिशाली सेना है जो अपने आर्थिक हितों की रक्षा करने की कोशिश कर रही है और इन्हें एक संघीय एवं लोकतांत्रिक प्रणाली में बचाए नहीं जा सकते। उन्होंने कहा कि सेना के खिलाफ पश्तून इलाकों में शुरू हुए प्रदर्शन अब पंजाब में भी पहुंच गए हैं, जो पाक सेना का गढ़ है। 

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