By अनुराग गुप्ता | Oct 01, 2021
पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में अंतर्कलह का सामना कर रही कांग्रेस के लिए एक और मुश्किल खड़ी हो गई है। जी23 के नेता चाहते हैं कि सीडब्ल्यूसी की बैठक हो और संगठनात्मक चुनाव कराए जाएं। इसी बीच एक वरिष्ठ नेता ने राहुल गांधी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने कहा कि वो किसी भी पद पर नहीं हैं फिर भी अमरिंदर जैसे वरिष्ठ नेता को हटाकर सिद्धू को ले आएं। इसके बाद बात दिग्विजय सिंह की होगी, जिन्होंने गृह मंत्री अमित शाह की तारीफ की है और अंत में बात उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की करेंगे।
पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह ने राहुल गांधी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। उन्होंने कहा कि न तो CWC की बैठक होती है और न ही AICC की बैठक होती है। तीन लोग बैठे हुए हैं, एक के पास तो कोई पद भी नहीं है।दिग्विजय ने की अमित शाह की प्रशंसाकांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह वैसे तो आमतौर पर आरएसएस और गृह मंत्री अमित शाह के कट्टर आलोचकों में से एक हैं लेकिन बीते दिनों उन्होंने खुलासा किया कि 4 साल पहले उनकी नर्मदा परिक्रमा यात्रा के दौरान कैसे शाह और आरएसएस कार्यकर्ताओं ने उनकी मदद की।आपको बता दें कि दिग्विजय सिंह और उनकी पत्नी अमृता ने साल 2017 में छह माह तक नर्मदा नदी के किनारे पैदल परिक्रमा कर कठिन यात्रा पूरी की थी। दिग्विजय सिंह ने बताया कि एक बार हम सब लगभग दस बजे गुजरात में एक स्थान पर पहुंचे। वन क्षेत्र से आगे जाने का कोई रास्ता नहीं था और रात में ठहरने की भी कोई सुविधा वहां नहीं थी। तभी वहां पर एक वन अधिकारी आया और उसने बताया कि अमित शाह जी ने उसे हमारे साथ पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया था।
आम आदमी पार्टी का बड़ा ऐलानउत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर तमाम पार्टियां तरह-तरह के दावे कर रही हैं। इसी बीच आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता मनीष सिसोदिया ने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि यदि उनकी पार्टी की उत्तर प्रदेश में सरकार बनती है तो पहले ही साल शिक्षा का बजट बढ़ाकर 25 प्रतिशत किया जाएगा।सिसोदिया ने कहा कि साल 2016-17 में उत्तर प्रदेश का शिक्षा बजट 17 प्रतिशत के करीब था जिसे योगी सरकार लगातार घटा रही है और आज इसे 13 प्रतिशत पर ले आयी है। आज प्रदेश में सवा लाख शिक्षा मित्र धक्के खा रहे हैं। महिला शिक्षकों ने तो सिर मुड़ाकर योगी सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। पांच साल पहले 60 प्रतिशत बच्चे सरकारी स्कूलों और 40 प्रतिशत बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ते थे, लेकिन आज यह अनुपात उल्टा हो गया है। आज 60 प्रतिशत बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ रहे हैं।