By प्रभासाक्षी न्यूज़ डेस्क | Oct 08, 2026
मुंबई, आठ अक्टूबर पूर्व राष्ट्रीय कोच प्रकाश पादुकोण ने एशियाई खेलों में भारत के बैडमिंटन में प्रदर्शन को बृहस्पतिवार को ‘थोड़ा निराशाजनक’ बताया और कहा कि देश के खिलाड़ियों को अपने पिछले पदकों की बराबरी करनी चाहिए थी या उससे बेहतर प्रदर्शन करना चाहिए था। भारत ने एशियाई खेलों में केवल टीम कांस्य पदक जीता जिसे पादुकोण ने देश में उपलब्ध प्रतिभा को देखते हुए उम्मीदों से कम माना। एक प्रचार कार्यक्रम के दौरान 1980 ऑल इंग्लैंड चैंपियन पादुकोण ने पत्रकारों से कहा, ‘‘मुझे लगता है कि यह थोड़ा निराशाजनक था।
मैं भी कम से कम पिछली बार की पदक तालिका के बराबर की उम्मीद कर रहा था। ’’ हालांकि पादुकोण ने कहा कि इस नतीजे से व्यापक निष्कर्ष निकालना अभी जल्दबाजी होगी। उन्होंने खिलाड़ियों के साल भर चलने वाले व्यस्त कार्यक्रम की ओर इशारा किया और अधिक निरंतरता की मांग की।
उन्होंने कहा, ‘‘ ये पूरे साल खेलते हैं इसलिए हर किसी के लिए हर समय शीर्ष पर बने रहना बेहद मुश्किल है। लेकिन मैं निश्चित रूप से चाहता हूं कि खिलाड़ी अधिक निरंतर रहें, और यह संभव है। यह निश्चित रूप से समर्थन की कमी नहीं है।
’’ पादुकोण ने कहा, ‘‘उन्हें काफी समर्थन मिलता है। मुझे लगता है कि उन्हें थोड़ा और प्रयास करने की जरूरत है। वे अच्छा कर रहे हैं।
उन्होंने एक बड़ा टूर्नामेंट जीता भी है। लेकिन उन्हें अधिक निरंतर रहने की जरूरत है। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि आप जिन भी टूर्नामेंटों में खेलते हैं, उन सभी को जीतें।
लेकिन कम से कम क्वार्टर, सेमीफाइनल तक पहुंचें। आप एक टूर्नामेंट जीतते हैं और फिर अगले में हार जाते हैं। पहले दौर में, आप किसी से हार जाते हैं।
तो मुझे लगता है कि इससे बचना चाहिए। ’’ उन्होंने सुझाव दिया कि शीर्ष खिलाड़ियों को हर सत्र में चार या पांच प्रमुख टूर्नामेंट की पहचान करनी चाहिए और पूरे साल अपना सर्वश्रेष्ठ फॉर्म बनाए रखने की कोशिश करने के बजाय उनमें शीर्ष प्रदर्शन करने का लक्ष्य रखना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने हमेशा कहा है कि पूरे साल में चार या पांच महत्वपूर्ण टूर्नामेंट चुनें और उन टूर्नामेंटों के दौरान शीर्ष पर पहुंचने की कोशिश करें।
इसका मतलब यह नहीं है कि आप अन्य टूर्नामेंटों में अच्छा प्रदर्शन नहीं करें। लेकिन उन्हें जिस तरह का सहयोग मिलता है, उसे देखते हुए मुझे लगता है कि उनके लिए अधिक निरंतर रहने की गुंजाइश है। ’’ पादुकोण ने दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधू का भी विशेष रूप से उल्लेख किया और कहा कि उनकी हाल में जापान ओपन में जीत ने उस भूख को दिखाया है जिसे अन्य भारतीय खिलाड़ियों को भी अपनाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि इतने सारे पदक जीतने के बावजूद उनमें अब भी भूख है। इसलिए मुझे लगता है कि इसी तरह की भूख बाकी सभी को भी दिखानी चाहिए। खासकर लक्ष्य और यहां तक कि युगल जोड़ियों को भी।
उन्होंने जो हासिल किया है उससे संतुष्ट नहीं हों। बड़े टूर्नामेंट जीतने का लक्ष्य रखें। अच्छा खेलें और अगले पांच-छह वर्षों में पूरी ताकत लगा दें।
क्योंकि वे सभी अभी भी बहुत युवा हैं।