By अंकित सिंह | Apr 10, 2026
केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भारत में द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की आपूर्ति में आई बाधाओं के बीच खाना पकाने की तकनीक में बदलाव लाने का प्रस्ताव रखा है और एक नए बिजली से चलने वाले चूल्हे को संभावित क्रांतिकारी बदलाव बताया है। X पर एक पोस्ट में जोशी ने कहा कि उन्होंने एक आयातित चूल्हे का प्रदर्शन देखा, जो बिजली से लौ जैसी बर्नर उत्पन्न करता है और पारंपरिक एलपीजी खाना पकाने की तरह ही काम करता है। इस तकनीक से प्रभावित होकर उन्होंने भारतीय निर्माताओं से इसे अपनाने और घरेलू स्तर पर इसका बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू करने का आग्रह किया।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री की ये टिप्पणियां ऐसे समय में आई हैं जब भारत की ऊर्जा संबंधी असुरक्षा स्पष्ट रूप से सामने आई है। देश अपनी लगभग 88 प्रतिशत कच्ची तेल की आवश्यकता, लगभग आधी प्राकृतिक गैस की आवश्यकता और लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी की आवश्यकता आयात करता है, जिससे यह वैश्विक आपूर्ति संकटों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील हो जाता है। पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से ऊर्जा प्रवाह बाधित हो गया, जिससे स्थिति और बिगड़ गई। यह जलडमरूमध्य वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का एक प्रमुख पारगमन मार्ग है। भारत के आयात का एक बड़ा हिस्सा - जिसमें कच्चे तेल का आधे से अधिक, प्राकृतिक गैस का लगभग 40 प्रतिशत और एलपीजी का 90 प्रतिशत तक शामिल है - इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
अमेरिका-इजराइल-ईरान संघर्ष के दौरान जलडमरूमध्य के अस्थायी रूप से बंद होने से आपूर्ति में बाधा उत्पन्न हुई, जिसके चलते भारत को शुरुआत में होटलों और रेस्तरां जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को एलपीजी की आपूर्ति कम करनी पड़ी। वैकल्पिक स्रोतों की व्यवस्था किए जाने के बाद आपूर्ति को आंशिक रूप से बहाल कर संकट-पूर्व स्तर के लगभग 70 प्रतिशत तक पहुँचा दिया गया है।