प्रमोद सावंत: गोवा में भाजपा के भरोसे को रखा बरकरार, पर्रिकर को मानते हैं अपना गुरु

By अंकित सिंह | Apr 24, 2022

मनोहर पर्रिकर की अनुपस्थिति में गोवा में एक बार फिर से सत्ता में आना बीजेपी के लिए एक बड़ी चुनौती थी। हालांकि प्रमोद सावंत के नेतृत्व में भाजपा ने यह कामयाबी हासिल की। 2022 के चुनाव में 2017 के मुकाबले उसे बड़ी सफलता मिली। इसके साथ ही प्रमोद सावंत गोवा में मनोहर पर्रिकर के खाली स्थान को भी भरते नजर आ रहे हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में गोवा में भाजपा ने 20 सीटों पर जीत हासिल की। इस जीत के साथ ही राज्य के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया। भाजपा यह संदेश देने में कामयाब होती दिखी कि पार्टी अपने दिग्गज नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिवंगत मनोहर पर्रिकर की परछाई से बाहर निकल चुकी है और इसमें सबसे बड़ी भूमिका प्रमोद सावंत की रही।

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इसके बाद सावंत ने 2017 के चुनाव में भी विजय प्राप्त की। 22 मार्च 2017 को, उन्हें गोवा विधान सभा के अध्यक्ष के रूप में चुना गया था। आयुर्वेद चिकित्सक एवं उत्तर गोवा की सांखालिम सीट से तीन बार विधायक चुने गए सावंत पर्रिकर को अपना गुरू मानते हैं। मार्च 2019 में पर्रिकर के निधन के बाद उन्हें मुख्यमंत्री बना दिया गया। सावंत को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का करीबी माना जाता है और तस्वीरों में वह मुख्यमंत्री रहते हुए संघ के एक कार्यक्रम में भाग लेते दिखाई दिए थे। सावंत के कार्यकाल के दौरान कोरोना वायरस महामारी की शुरुआत हुई और उनकी सरकार को राज्य के सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन की किल्लत के चलते आलोचना का सामना करना पड़ा। बावजुद इसके सावंत को कोरोना मैनेजमेंट हिट साबित हुआ।

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2022 विधानसभा चुनाव में सावंत ने कांग्रेस के नेता एवं अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी धर्मेश संगलानी को 666 मतों के अंतर से हराया था। सावंत की पत्नी सुलक्षणा भी भाजपा की सक्रिय सदस्य हैं और राज्य में पार्टी की महिला शाखा से जुड़ी हुई हैं। भगवा दल सत्ता विरोधी लहर और टिकट आवंटन को लेकर पर्रिकर के बेटे समेत कई अहम नेताओं के इस्तीफे के झटकों से सावंत के नेतृत्व में पार पाने में सफल रहा और उसने 40 सदस्यीय विधानसभा चुनाव के लिए हाल में हुए बहुकोणीय मुकाबले में 20 सीटें जीतकर अपना अब तक का दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। सावंत राज्य के विधानसभा चुनाव में खंडित जनादेश की आशंका को धत्ता बताते हुए पार्टी को विजय दिलाने में सफल रहे। मार्च, 2019 में पहली बार मुख्यमंत्री बने सावंत के नेतृत्व में पार्टी स्पष्ट बहुमत हासिल करने में मात्र एक सीट से चूक गई। तीन निर्दलीय विधायकों और महाराष्ट्रवादी गोमंतक पार्टी (एमजीपी) के दो विधायकों ने भाजपा को समर्थन दिया है।

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