Kashmir को पूरी तरह आतंक मुक्त बनाने की तैयारी तेज, Amit Shah ने सुरक्षा बलों को दिए मिशन मोड में काम करने के निर्देश

By नीरज कुमार दुबे | Jan 09, 2026

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए जम्मू-कश्मीर की सुरक्षा स्थिति की व्यापक समीक्षा की है। इस दौरान उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि आतंकवादी ढांचे और आतंकवाद के वित्तपोषण को निशाना बनाने वाले अभियान मिशन मोड में बिना रुके जारी रहने चाहिए। उनका साफ संदेश था कि अब आधे अधूरे प्रयासों की कोई गुंजाइश नहीं है और जम्मू-कश्मीर को जल्द से जल्द आतंकवाद मुक्त बनाने के लक्ष्य के लिए हर संसाधन झोंक दिया जाएगा।


केंद्रीय गृह मंत्री ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने और आपसी तालमेल के साथ काम करते रहने का निर्देश दिया ताकि अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जो उपलब्धियां हासिल हुई हैं वे कमजोर न पड़ें। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार इस दिशा में किसी भी स्तर पर संसाधनों की कमी नहीं आने देगी और जरूरत पड़ी तो और कड़े कदम उठाए जाएंगे। हम आपको बता दें कि इस बैठक में जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा, केंद्रीय गृह सचिव, खुफिया ब्यूरो के निदेशक, केंद्र शासित प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के प्रमुख और अन्य उच्चाधिकारी भी बैठक का हिस्सा थे।

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अमित शाह ने सुरक्षा एजेंसियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार जम्मू-कश्मीर में स्थायी शांति स्थापित करने और आतंकवाद को जड़ से खत्म करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने दोहराया कि आतंकवाद के प्रति कतई बर्दाश्त नहीं करने की नीति पर सरकार अडिग है और इसी नीति के कारण बीते वर्षों में आतंकवादी तंत्र को काफी हद तक कमजोर किया गया है।


बैठक के बाद जारी सरकारी बयान के अनुसार, बैठक में सीमा पार से होने वाली साजिशों, आतंकी नेटवर्क, ओवर ग्राउंड वर्करों और हवाला जैसे माध्यमों से होने वाले वित्तपोषण पर विस्तार से चर्चा हुई। केंद्रीय गृह मंत्री ने साफ कहा कि आतंकी ढांचे पर चोट करने के साथ साथ उसके पैसों की नलियां बंद करना सबसे अहम है और इसी मोर्चे पर निर्णायक वार की जरूरत है।


देखा जाये तो आतंकवाद कोई अकेली घटना नहीं होता, यह एक पूरा उद्योग होता है जिसमें हथियार, पैसे, प्रचार और डर का संगठित तंत्र काम करता है। अगर इस तंत्र की एक कड़ी भी बची रह जाए तो समस्या फिर सिर उठा लेती है। इसलिए अमित शाह का जोर केवल बंदूक पर नहीं बल्कि पैसे और नेटवर्क पर भी है और यही इस नीति की सबसे मजबूत कड़ी है।


अनुच्छेद 370 हटने के बाद कश्मीर में हालात बदले हैं, यह सच है, लेकिन यह भी उतना ही सच है कि सीमा पार बैठे आका अब भी मौके की तलाश में हैं। वे चाहते हैं कि किसी तरह घाटी में फिर से आग भड़के और पुरानी अस्थिरता लौट आए। ऐसे में ढील देना सीधे तौर पर उन ताकतों को न्योता देने जैसा होगा। मिशन मोड़ का अर्थ यही है कि सुरक्षा एजेंसियां इंतजार में न रहें बल्कि पहल करें, सटीक खुफिया जानकारी पर तुरंत कार्रवाई हो और आतंक के हर मददगार को बेनकाब किया जाए।


इस पूरे अभियान में एक और अहम पहलू है आम नागरिक का भरोसा। आतंकवाद के खिलाफ जंग केवल सुरक्षाबलों से नहीं जीती जाती, बल्कि समाज के साथ मिलकर जीती जाती है। जब वित्तपोषण के स्रोत सूखते हैं, ओवर ग्राउंड नेटवर्क टूटते हैं और डर का माहौल खत्म होता है, तब आम लोग भी खुलकर आतंक के खिलाफ खड़े होते हैं। सरकार को यह समझना होगा कि कड़े कदमों के साथ साथ पारदर्शिता और संवेदनशीलता भी जरूरी है ताकि निर्दोष लोगों का विश्वास बना रहे।


देखा जाये तो अमित शाह की भाषा में जो सख्ती दिखी है वह समय की मांग है। वर्षों तक आतंकवाद को राजनीतिक चश्मे से देखा गया, कभी वोट बैंक के डर से तो कभी अंतरराष्ट्रीय दबाव के नाम पर। नतीजा यह हुआ कि समस्या जटिल होती चली गई। आज जरूरत है स्पष्ट नीति की, जिसमें संदेश एकदम साफ हो कि हिंसा का रास्ता चुनने वालों के लिए यहां कोई जगह नहीं है। बहरहाल, कश्मीर में स्थायी शांति तभी आएगी जब आतंक का आखिरी ढांचा भी ढह जाएगा और उसके पीछे खड़ा वित्तीय जाल पूरी तरह नष्ट होगा। 

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